नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच फंसे भारतीय जहाजों की घर वापसी का रास्ता साफ होता दिख रहा है।भारी फीस वसूले जाने की खबरों और अनिश्चितता के माहौल के बीच दो महत्वपूर्ण भारतीय जहाज, पाइन गैस और जग वसंत, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि मार्च के अंत तक ये जहाज भारतीय तटों पर दस्तक दे सकते हैं। इन जहाजों की आवाजाही को लेकर हाल ही में यह खबरें उठी थीं कि ईरान इनसे गुजरने के बदले भारी शुल्क की मांग कर रहा है। हालांकि, भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि जहाजों से 20 लाख (2 मिलियन) डॉलर की राशि वसूलने की खबरें केवल व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं, यह ईरान का आधिकारिक रुख नहीं है। ईरान के अनुसार, इस मार्ग से जहाजों को निकालने के लिए अधिकारियों के साथ पहले से की गई बातचीत और समन्वय ही एकमात्र आधिकारिक रास्ता है। आंकड़ों के अनुसार, एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। इन दोनों जहाजों पर लगभग 92,000 टन एलपीजी लदी है, जो भारत में लगभग एक दिन की रसोई गैस की खपत के बराबर है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इन जहाजों की यात्रा शुरू हो चुकी है और आमतौर पर खाड़ी से भारत पहुंचने में इन्हें दो से ढाई दिन का समय लगता है। ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने और पहचान स्पष्ट करने के लिए ये टैंकर ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के बीच से होकर गुजरे। ये जहाज उन 22 भारतीय जहाजों का हिस्सा हैं जो क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गए थे। इससे पहले भी एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी जैसे जहाज सुरक्षित रूप से गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को बड़ी राहत मिली है।