जो पानी से नहाते हैं वे लिबास बदलते हैं,जो पसीने से नहाते हैं वे इतिहास बदलते हैं!

क्रिकेट और कसौटी
परीक्षा के पेपर देकर खाली बैठे या परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों के लिए टी-20 वर्ल्ड कप से कितने-कितने ‘टेक अवे लेसन’ हैं?1960 के दशक में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में एक छात्र था, जिसका नाम फ्रेड स्मिथ था। परीक्षा में उसे एक प्रोजेक्ट बनाना था। उसमें उसने एक आइडिया लिखा- अर्जेंट डोर-टू-डोर पार्सल डिलीवरी का। उस समय दुनिया अभी धीमी गति से चलती थी। तेज कार, ट्रेन या फ्लाइट का युग नहीं था। आज जैसी भागदौड़ और उतावली नहीं थी। मोबाइल या इंटरनेट का तो अस्तित्व ही नहीं था। फिल्मों या टीवी में भी तेज कट्स नहीं होते थे।स्मिथ के प्रोफेसर साहब नाराज हो गए। उन्हें छात्र का जवाब बिना समझ का अंदाजा लगा। पांच-सात दिन में पहुंचने वाली डाक और उसके जवाब के जमाने में फटाफट पार्सल डिलीवरी में कौन पैसे खर्च करेगा और ऐसी डिलीवरी हो ही कैसे सकती है? ऐसा उन्हें लगा। इसके लिए ज्यादा खर्च होगा और व्यावहारिक रूप से ऐसी दौड़भाग संभव नहीं है, ऐसा मानकर उन्होंने स्मिथ की उत्तरपुस्तिका में ‘अव्यावहारिक’, ‘खर्चीला’, ‘फालतू’, ‘अमल में असंभव’ जैसे रिमार्क लिखकर गुस्से में उसे बहुत कम ग्रेड दे दिया।read more:https://khabarentertainment.in/three-arrested-for-cheating-of-rs-85000-in-the-name-of-cheap-cosmetics/ लेकिन स्मिथ उस परिणाम से निराश नहीं हुआ। उसे खुद पर भरोसा था और उसे विश्वास था कि समय आने पर वह इस आइडिया को वास्तव में लागू कर सकेगा। उस कम ग्रेड को उसने निराशा की जगह प्रेरणा बना लिया। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। मानलीजिए कि आपको असफलता मिल जाए, आप फेल हो जाएं या सच में आपको कुछ न आया हो और गलती हो गई हो। तो वह घटना आपको नहीं गिराती। बल्कि उस घटना के प्रति आपका व्यवहार आपको गिराता है! परिणाम आपको परिभाषित नहीं करता, प्रतिक्रिया आपको परिभाषित करती है। आप भूतकाल की गलतियों से नया सीख सकते हैं या यदि गलती न भी हो तो आत्मविश्वास खोए बिना खुद को बेहतर बनाते रहकर फिर से नया मौका मिलने का इंतजार कर सकते हैं। उस इंतजार में असीम धैर्य और थके बिना, ऊबे बिना अवसर को ताकत में बदलने की तैयारी चाहिए।तो फ्रेड स्मिथ के उस प्रोफेसर का नाम आज कोई नहीं जानता। लेकिन उनकी कड़ी आलोचना के बावजूद उसी आधार पर उसने 1971 में आर्कांसस राज्य में जो फास्ट डिलीवरी की ‘फेडरल एक्सप्रेस’ प्रणाली विकसित की, उसे पूरी दुनिया जानती है। उसका नाम है- फेडेक्स। बहस करने की जगह उसने प्रदर्शन से जवाब दिया और एक बार फिर यह साबित किया कि आपके ग्रेड या मार्क्स सिर्फ उस समय आप कितने और कैसे होशियार थे, उसका दस्तावेज़ी रिकार्ड हैं। वे आपका पूरा जीवन, काम या व्यक्तित्व नहीं हैं। परीक्षा में अच्छे रैंक वाले पीछे रह सकते हैं और कमजोर रैंक वाले आगे आ सकते हैं, अगर उनमें बिना थके मेहनत करने का जुनून और नया समझकर खुद को सुधारने की लगन हो! पेपर खराब गए हों तो घबराना नहीं, स्कोर शून्य हो तो डरना नहीं। अगली बार तैयारी कमजोर नहीं होनी चाहिए। ताकत शून्य नहीं होनी चाहिए। दूसरा मौका एक गुणवत्ता होगा और बिना हताशा या नखरों के चुपचाप अनुशासित काम करने की आदत होगी, तो चैंपियन बनने का दूसरा मौका जरूर मिलेगा।read more:https://khabarentertainment.in/three-arrested-for-cheating-of-rs-85000-in-the-name-of-cheap-cosmetics/  जैसे संजू सैमसन।अक्टूबर, 2025 में यानी छह महीने पहले भारत के मूल विस्फोटक ओपनर और चयन समिति के अध्यक्ष रहे कृष्णमाचारी श्रीकांत ने भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर की नाम लेकर आलोचना की थी कि संजू सैमसन के करियर के साथ गलत किया गया है। पहले टी-20 में दुर्लभ मानी जाने वाली लगातार तीन शतक लगाने का पराक्रम कर चुके संजू सैमसन अलग स्वभाव के खिलाड़ी हैं। वे कभी-कभी नहीं चलते, लेकिन चल पड़ें तो विरोधियों को ध्वस्त कर देते हैं। साथ में वे विकेटकीपर भी हैं और किसी बल्लेबाज की जगह नहीं रोकते। ऋषभ पंत विस्फोटक बल्लेबाज हैं, लेकिन अभी भी गैरजिम्मेदार खेलते हैं। राहुल धीमे खेलते हैं। ईशान अच्छे बल्लेबाज है, लेकिन विकेटकीपिंग औसत है। संजू स्वाभाविक स्ट्रोक मेकर हैं।ओपनिंग में सहज रहने वाले संजू को टीम मैनेजमेंट ने प्रयोग करते हुए कभी तीसरे नंबर से लेकर आठवें नंबर तक अलग-अलग स्थान पर खिलाया। यह एक तरह की मानसिक परीक्षा थी। ताकि उनका मनोबल टूट जाए और खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम से बाहर किया जा सके। फिर भी उन्होंने पांचवें नंबर पर एक शानदार पारी खेली। लेकिन मैनेजमेंट के प्रिय शुभमन गिल को टी-20 में स्टार बनाने की जिद में संजू की ओपनिंग पोजीशन की बलि चढ़ाई गई।read more:https://khabarentertainment.in/bsp-to-hold-crucial-meeting-in-dibulganj-on-march-11-strategy-to-be-chalked-out-for-lucknow-chalo-mega-rally/ घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करके संजू टीम में तो रहे, लेकिन वर्ल्ड कप में कप्तान-कोच ने उन्हें महत्वपूर्ण खिलाड़ी नहीं माना। यहां तक कि प्रेस क्न्फ्रेंस में पूछा गया कि उन्हें क्यों नहीं खिलाते तो जवाब मिला कि उन्हें किसकी जगह खिलाऊं?लेकिन नियति मेहनत की कदर कभी-न-कभी करती ही है। अचानक रिंकू सिंह के पिता का निधन हो गया और शुभमन गिल घायल थे। संजू को ओपनिंग करने का मौका मिला। जिन्हें टीम में लेने लायक नहीं माना जा रहा था, उन्होंने मौका मिलते ही कम मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाए और वह भी शानदार खेल के साथ और मैन आफ द सीरीज बने। याद रहे, उनकी तीनों बड़ी पारियां नॉकआउट मैचों में आईं वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में। अगर भारत हार जाता तो सीधे बाहर हो जाता।सफलता सैकड़ों सवालों का एक मजबूत जवाब होती है। जिन लोगों ने पहले आलोचना की थी, उन्हें बाद में संजू की तारीफ करनी पड़ी। उन्होंने व्यक्तिगत शतक की चिंता किए बिना टीम के लिए रन बनाए और बिना अजीब हेयरस्टाइल या दिखावे के ही सुपरस्टार बन गए।read more:https://khabarentertainment.in/bsp-to-hold-crucial-meeting-in-dibulganj-on-march-11-strategy-to-be-chalked-out-for-lucknow-chalo-mega-rally/  विकेटकीपर के रूप में ईशान जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी का भी साथ मिला। लेकिन संजू पहले की तरह शांत रहे। जीत के बाद भी उन्होंने मैदान पर कोई उछलकूद नहीं की। जिस पत्नी चारूलता से उन्होंने पढ़ाई के दौरान अंतरधार्मिक प्रेम विवाह किया था (संजू ईसाई हैं और उनकी पत्नी हिंदू हैं), उन्हें संबोधित करते हुए उन्होंने एक सुंदर प्रेम-पत्र जैसी पोस्ट लिखी।उन्होंने लिखा, “प्रिय, तुमने मेरे अच्छे और बुरे दोनों समय देखे हैं और मेरे जितना ही क्रिकेट को महत्व दिया है। तुमने हमेशा मुझ पर भरोसा रखा और मेरा साथ दिया। इस जीत में तुम्हारा भी हिस्सा है।”संजू शांत स्वभाव के हैं। वह उग्र प्रतिक्रिया देने या बिना सोचे बोलने की जगह चुप रहते हैं, आत्मचिंतन करते हैं, गलतियां सुधारते हैं और बिना दिखावे के वापसी करते हैं।कुछ संस्कार परिवार से भी मिलते हैं। संजू के पिता विश्वनाथ ने दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़कर बेटे की क्रिकेट प्रतिभा के लिए केरल वापस लौटने का निर्णय लिया था। जब पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने उनसे पूछा, “अब क्या जश्न मनाएंगे?” तो उन्होंने कहा, “मेरे बेटे ने वही किया, जो देश की टीम के लिए उसका काम था। अच्छा खेलना उसकी जिम्मेदारी है। हम खुश हैं, लेकिन इसके लिए कोई विशेष पार्टी नहीं होगी।”परीक्षा दे चुके या देने वाले छात्रों के लिए इस टी-20 वर्ल्ड कप से कई सीख मिलती हैं।(1) रोहित शर्मा ने कहा कि कप्तान बनने के बाद उन्होंने अपना दृष्टिकोण बदला। व्यक्तिगत रिकार्ड के बजाय टीम के लिए खेलना शुरू किया। जब आप सिर्फ अपने हित की नहीं सोचते, तो लोग आप पर भरोसा करते हैं।(2) आज के तेज समय में धैर्य और शांत रहना भी बहुत बड़ी ताकत है। हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं। संजू की तरह शांत रहकर अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।(3) क्रिकेट हो या परीक्षा, हर बार परिणाम आपकी गुणवत्ता नहीं बताता। कभी-कभी परिस्थितियां भी परिणाम तय करती हैं।(4) हर किसी को लोकप्रिय मंच नहीं मिलता। भीड़ बहुत बड़ी है। इसलिए ऐसा लक्ष्य चुनना चाहिए, जिसमें आप लंबे समय तक टिक सकें।(5) कई लोकप्रिय क्रिकेटरों ने प्रेम विवाह किए हैं और जाति-धर्म के भेद के बिना जीवनसाथी चुना है। यदि अनुशासन हो तो रिश्ते कैरियर में बाधा नहीं बनते।तो खेलो, जीतो और आनंद लो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *