मानव धर्म व्याख्यानमाला में गूंजा सत्य, न्याय और मानवता का संदेश

गाजीपुर। जनपद के ग्राम अतरौली में मानव धर्म के प्रचार-प्रसार तथा समाज में सत्य, न्याय और मनुष्यता के मूल्यों को स्थापित करने के उद्देश्य से मानव धर्म व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, स्वयंसेवकों और अनुयायियों ने भाग लेकर मानव धर्म के सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया। व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग 50 वर्ष पहले सामाजिक न्याय और राष्ट्रवाद की राजनीति से लोग अधिक परिचित नहीं थे, लेकिन कुछ लोगों के सतत प्रयासों के कारण आज ये विषय भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार मानव धर्म की विचारधारा भी धीरे-धीरे समाज में अपनी पहचान बना रही है और लोग इसके मूल सिद्धांतों को समझने लगे हैं। उन्होंने बताया कि मानव धर्म की शुरुआत वर्ष 1946 में कानपुर के घाटमपुर से हुई थी। आज यह विचारधारा कोलकाता, वाराणसी, मुंबई, फरीदाबाद, नोएडा, गुजरात और गाजीपुर सहित देश के कई क्षेत्रों में फैल चुकी है। लोग सत्य, न्याय, धर्म और जातिविहीन समाज की स्थापना के लिए जागरूक हो रहे हैं।माधव कृष्ण ने कहा कि मानव धर्म के प्रवर्तक गंगा बाबा कहा करते थे कि एक दिन पूरा विश्व मानव धर्म के झंडे के नीचे आएगा। आज जब दुनिया में युद्ध और तनाव की स्थितियां बन रही हैं, तब बहुसंख्यक लोग सत्य, न्याय, धर्म और अहिंसा की बात कर रहे हैं, जो मानव धर्म के मूल सिद्धांत हैं।read more:https://pahaltoday.com/minister-of-state-for-defence-welcomes-insv-kaundinya-after-successful-completion-of-her-maiden-overseas-visit-to-oman/
उन्होंने कहा कि ईश्वर और गुरु को मनुष्य रूप में पहचानना हर किसी के लिए सरल नहीं होता। निर्गुण को मान लेना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन सगुण रूप को समझने के लिए भाव और प्रेम की आवश्यकता होती है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग ईश्वर या गुरु को केवल मनुष्य शरीर के रूप में देखकर उनकी अवज्ञा करते हैं, वे उनके वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचान पाते।कार्यक्रम में उपस्थित उद्योगपति इंद्रदेव सिंह ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि गंगा बाबा सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देते थे। उनका कहना था कि मनुष्य को वही कपड़ा पहनना चाहिए जिसे वह हमेशा पहन सके और वही भोजन करना चाहिए जिसे वह निरंतर ग्रहण कर सके। जीवन में सादगी, संयम और समय का सदुपयोग ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है।
कार्यक्रम का समापन गुरुदेव की आरती और सामूहिक भोजन महाप्रसाद के साथ हुआ। इस अवसर पर सर्वराहकार भोला बाबा, गजराज बाबा, वीरेंद्र ब्रह्मचारी, जितेंद्र बाबा, साहिब, वीरेंद्र, अजय, अनिरुद्ध, सोनू, उपेंद्र, राजिंदर, माला, मोहन, गणेश, मोहन यादव, होरीलाल यादव, संजय यादव, सोनू यादव, राजेंद्र यादव, वशिष्ठ यादव (मास्टर), राम अवध यादव, मंगल यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी व स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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