Wed. Jul 17th, 2019

विधानसभा में नितीश कुमार ने दिया बयान

'नीतीश हटाओ-भविष्य बचाओ'

नीतीश कुमार - सरकार की ओर से कोई कोताही नहीं हुई है

विधानसभा में नितीश कुमार ने दिया बयान
पहल टुडे स्टेट ब्यूरो
सीमा सिन्हा,पटना।
पटना,1 जून। बिहार में चमकी बुखार (इंसेफेलाइटिस) से हुई मौतों पर मुख्योमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में पहली बार बिहार विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि बारिश गिरने के साथ ही चमकी बुखार से हो रही मौतों में कमी आई है. उन्होंने सदन में उपस्थित सदस्यों से कहा कि 2014 से ही इस बीमारी के कारणों को लेकर रिसर्च किया जा रहा है. इसकी रिपोर्ट अमेरिका भी भेजी गई है.
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने इस बीमारी से बचाव के लिए पूरी कोशिश की है. हालांकि हम अभी इसमें पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में एक ओर जहां बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का बचाव किया तो वहीं एईएस से काफी संख्या में हुई बच्चों की मौत पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं है, इतनी संख्या में बच्चों की मौत हो गई है, उसके प्रति हम सिर्फ शोक प्रकट नहीं कर सकते. यह बहुत ही गंभीर मामला है. उन्होंकने कहा कि चमकी बुखार पर रिसर्च के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है. इसके साथ ही सरकार राज्यि में जागरूकता फैला रही है. यहां बता दें कि बिहार के स्वा.स्य्ख् मंत्री के बयान के दौरान विपक्ष ने सदन में हंगामा कर दिया. हालांकि नीतीश कुमार के जवाब के दौरान विपक्ष के नेता फिर से सदन में पहुंच गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, सिर्फ दुख व्यक्त करना ही पर्याप्त नहीं है. यह एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है. हमने कई बैठकें की हैं और इस मुद्दे पर चर्चा की है. यह भी कहा गया कि चमकी बुखार के ज्यादातर पीडित गरीब परिवार के होते हैं. इस पर मेरा कहना है कि इसके लिए एक सोशियो इकॉनमिक सर्वे कराया जाए.
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मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी सरकार की कमी बताई. उन्होंने कहा जब मैंने श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज का दौरा किया तो देखा कि वहां चमकी बुखार के मरीजों के अलावा अन्य मरीजों की संख्या भी बहुत ज्यादा रहती है. अस्पताल में बेड की कमी है, एक बेड पर दो-दो लोगों का इलाज चल रहा था. नीतीश कुमार ने कहा कि इस बीमारी के संबंध में हमलोगों ने बैठक की थी. साल 2014 के बाद इस प्रकार की बीमारी से बच्चों की मौत का सिलसिला चल रहा है. बीमारी का क्या कारण है? इस संबंध में एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है. कोई कहता है कि इसका संबंध सरयू नदी से है तो कोई कहता है लीची खाने से है. इसके कारण पर कोई एकमत नहीं है. जिसकी वजह से ही मैंने कहा था कि इस मामले को लेकर एक्सपर्ट्स की ज्वाइंट कमिटी बने. उन्होंने कहा कि इसके बार में मैंने जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही थी. इस बार इस बीमारी से बडी संख्या में बच्चों की मौत हो गईे. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बीमारी का कारण जानने के लिए एक टीम की संरचना की है.
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उन्होंने कहा कि गरीब परिवार के बच्चे इस बीमारी का शिकार बने हैं, जिसमें बच्चियों की संख्या ज्यादा थी. मैंनें बीमार बच्चों के माता-पिता से भी बात की. इसका सोशियो इकोनॉमिक सर्वे हो रहा है कि इस बीमारी का स्वरूप क्या है? वजह क्या है? एस्बेस्टस के घर में रहनेवाले बच्चों की ज्यादा हुई मौत की बात भी सामने भी आई है. वैसे मैं एस्बेस्टस के खिलाफ रहा हूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ एईएस तो दूसरी तरफ गया में लू से भी बडी संख्या में लोग मर गए. अधिकतर मरने वाले लोग अधिक उम्र के थे. गया में जापानी इंसेफेलाइटिस से हुई मौत के बारे में मैंने अधिकारियों से पूछा है. अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए वैक्सीनेशन किया जा रहा है. मैंने पूरे बिहार में वैक्सीनेशन के लिए कहा है. बिहार में 84 फीसदी टीकाकरण हो चुका है और हमारा 100 प्रतिशत का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि लोगों की मौजूदा हालत में सुधार करना हमारी प्राथमिकता है. इसबार भंयकर सूखे के आसार हैं और ये घटना हमलोगों के लिए चिंता की बात है. मौसम की स्थिति को लेकर कोई नहीं जानता. मौसम में दिख रहे बदलाव को लेकर सबको सचेत होना पडेगा नहीं तो पानी की समस्या पूरी दुनिया में बडी समस्या बनेगी.

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