Mon. Jul 22nd, 2019
मुबंई स्थित ब्रिज कैंडी हास्पिटल के आथ्रोपेडिक सर्जन एंड पोडियाट्रिस्ट डा. प्रदीप मुनोट

मुबंई स्थित ब्रिज कैंडी हास्पिटल के आथ्रोपेडिक सर्जन एंड पोडियाट्रिस्ट डा. प्रदीप मुनोट

रुमेटाइड ऑर्थराइटिस: कहीं पैर और टखने में दर्द तो नहीं, सावधान हो जाएँ

डा. प्रदीप मुनोट
मुबंई स्थित ब्रिज कैंडी हास्पिटल के आथ्रोपेडिक सर्जन एंड पोडियाट्रिस्ट डा. प्रदीप मुनोट का कहना है कि करीब 20 प्रतिशत मरीजों में इसके सबसे पहले लक्षण पैरों और टखने में नजर आते है. हालांकि हर व्यक्ति में लक्षण कुछ अलग हो सकते है जैसे-अकडन, विशेषकर सुबह के समय, जोडों पर सूजन, गतिशीलता कम होना, ऐसा दर्द जो जोडों के मूवमेंट के साथ बढ़ जाता हो, छोटे जोड़ों पर गूमड़े या उभार, जूते बांधने, जार का ढक्कन खोलने या शर्ट के बटन बंद करने जैसे रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होना, थकान आदि.

डा.प्रदीप मुनोट के अनुसार प्रभावित जोड़ों को मिलाया जाना रूमेटाइड ऑर्थराइटिस के उपचार के लिए सबसे सामान्य शल्य क्रिया है. इस शल्यक्रिया में एक जोड को हटा दिया जाता है और हड्डियों के दो किनारों को आपस में मिला दिया जाता है.

इससे बिना जोड वाली एक बडी हड्डी तैयार हो जाती है. यह क्रिया सामान्यतः रूमेटाइड ऑर्थराइटिस के गंम्भीर रोगियों में की जाती है. हड्डियों को जोडने के बाद हटाए गए जोड़ में कोई मूवमेंट नहीं रह जाता और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है.
उपचार के दौरान शरीर इन जोडों की हड्डियों के बीच में नई हड्डियां पैदा कर लेता है. टखने के रूमेटाइड ऑर्थराइटिस के उपचार के लिए एंकल फ्यूजन और टखने को बदलने के दो प्राथमिक सर्जिकल विकल्प उपलब्ध है. उपचार के दोनों ही विकल्पों से टखने के दर्द और परेशानी को कम किया जा सकता है. इनमें से किस तरह की शल्यक्रिया उपयुक्त रहेगी यह हर मरीज की स्थिति तथा कई अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करता है.
प्रस्तुति उमेश कुमार सिंह

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