अन्नदाता के लिए आतंक के पर्याय बनें छुट्टा साड़

अन्नदाता के लिए आतंक के पर्याय बनें छुट्टा  साड़

अकबर अली(बड़रॉव मऊ)

ब्लॉक छेत्र में छुट्टा साड़  के आतंक से  किसान परेशान व मजबूर हैं। क्षेत्र के  तटवर्ती इलाको में  साड़ो द्वारा हजारों एकड़ खड़ी फसल बर्बाद कर देने से किसान खेती का पैटर्न बदलने को मजबूर हो रहे हैं,  प्रति वर्ष बड़ी तादाद में बढ़ रहे साड़ो ने खडी फसल पर हमला बोल किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।


 इलाके के बड़े क्षेत्रफल में धान व गेहूं के अलावा बडी मात्रा में गन्ना, दलहनी व सब्जी की फसलें उगाई जाती हैं। कुछ वर्ष पहले दो-चार गांवों के बीच एकाध  छुट्टा पशु देखे जाते रहे थे, जिनकी संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। शुरुआती दिनों में ये सिर्फ दलहनी फसलों को ही नुकसान पहुंचाते रहे। अंधविश्वास और कानूनी प्रावधानों के चलते किसानों ने साड़ो पर किसी तरह के ¨हिंसक प्रहार से बचते हुए खेती के पैटर्न को ही बदल दिया और उनका रुझान अन्य फसलों की तरफ होता गया, लेकिन उस बदली हुई परिस्थितियों में छुट्टा पशुओं ने उन फसलों को भी अपने चपेट में ले लिया। परिणाम स्वरूप पहले से ही घाटे का क्षेत्र माने जाने वाला कृषि से लोगों का मोहभंग होता जा रहा है और लोग खेती छोड़कर रोजी रोटी रोजगार की तलाश महानगरों की ओर पलायन को मजबूर हो रहे हैं। क्षेत्रीय किसानों ने प्रशासन से छुट्टा पशुओं के आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग की है।अगर इनसे छुटकारा नही मिला तो रोजीरोटी के लाले पड़ जाएंगे।

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