लाला जी ने साम्राज्यवाद और सैन्यवाद को पूंजीवाद का जुङवा बच्चा कहा: राजेश मिश्र

लाला जी ने साम्राज्यवाद और सैन्यवाद को पूंजीवाद का जुङवा बच्चा कहा: राजेश मिश्र

लाला जी ने साम्राज्यवाद और सैन्यवाद को पूंजीवाद का जुङवा बच्चा कहा: राजेश मिश्र
(राजेश मिश्र,  हिन्दू श्रमिक महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)
लखनऊ : कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में पहली बार श्रमिकों के संगठनों उनकी न्यायोचित मांगों तथा उनके संघर्ष के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने का निर्णय लिया गया।
कांग्रेस के गया अधिवेशन(1922) में श्रमिकों को संघबद्ध करने के लिए एटक के साथ कांग्रेस ने सहयोग करने का निर्णय लिया।
निम्नलिखित कांग्रेसी नेताओं ने एटक की अध्यक्षता की थी। लाला लाजपतराय,सी.आर.दास,सी.एफ.एण्डूज, जे.एम.सेन गुप्त, सुभाषचंद्र बोस तथा जवाहरलाल नेहरू।
1918 में गांधीजी ने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन की स्थापना की। इसी संगठन द्वारा गांधी जी ने मजदूरों के लिए मध्यस्थता करने तथा अपने प्रसिद्ध ट्रस्टी – शिप दर्शन का उल्लेख किया।
वामपंथी विचारधारा के कारण 1926-27 में एटक का विभाजन हो गया।
एन.एम. जोशी के नेतृत्व में 1929 में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन फेडरेशन की स्थापना की।
1929 में एटक से पृथक हुए साम्यवादी नेता देशपांडे ने लाल ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना की।
कांग्रेस के अंदर 1934 में गठित समाजवादी कांग्रेस दल के प्रयासों से विभाजित एटक में पुनः एकता कायम हो गई।
कांग्रेस के अंदर वामपंथी विचारधारा वाले नेता जैसे- श्री पाद अमृत डांगे,मुजफ्फर अहमद,पूरनचंद्र जोशी तथा सोहन सिंह ने कामगार किसान पार्टी की स्थापना की।
सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय कांग्रेस ने मजदूर और किसान कांग्रेस के हाथ-पाँव हैं, का नारा दिया।
1930-36 के बीच मजदूर आंदोलन कमजोर हुआ, 1932-34 में शुरु हुए द्वितीय किसान सविनय अवज्ञा आंदोलन में मजदूरों की भागीदारी बहुत कम ही थी।
1937-39में प्रांतों में बनी कांग्रेस सरकारों के सहयोग से फिर मजदूर आंदोलन ने जोर पकङा।
3 सितंबर,1939 को शुरु हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के विरोध में बंबई के मजदूरों ने 2 अक्टूबर,1939 को समूचे विश्व में हङताल का आयोजन किया, जिसमें करीब 90,000 मजदूरों ने हिस्सा लिया।
एम.एन.राय जो साम्यवादी से अतिवादी लोकतंत्र के नेता बन गये थे, ने सरकार समर्थक श्रमिक दल इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर की स्थापना की.
भारत छोङो आंदोलन के समय 9 अगस्त,1942 को गांधी जी के गिरफ्तार कर लिये जाने पर दिल्ली, कलकत्ता,मद्रास, कानपुर,लखनऊ,बंबई, नागपुर,अहमदाबाद,जमदेशपुर,इंदौर,बंगलौर आदि में श्रमिक हङतालें हुई। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अंतिम वर्षों में समूचे देश के आर्थिक मुद्दे को लेकर हुई हङतालों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, इन हङतालों में डाक तार विभाग की हङताल सर्वाधिक प्रसिद्ध थी।
राष्ट्रवादियों ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में मई, 1947 में एटक से अलग होकर भारतीय राष्ट्रीय ट्रेक यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई।कांग्रेस के समाजवादी गुट ने हिन्द मजदूर सभा की स्थापना की।

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