हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है: राजेश मिश्र

हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है: राजेश मिश्र

हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है: राजेश मिश्र

(राजेश मिश्रहिन्दू श्रमिक महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

संयुक्त श्रम संहिता,  हम भारतीयों को कानून बनाना बहुत अच्छा लगता है। हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है, देश में केन्द्रीय श्रम कानूनों की संख्या ही 40 से ज्यादा है। बहुत समय से ऐसे प्रस्ताव आते रहे हैं कि इन सभी श्रम कानूनों को मिलाकर एक श्रम संहिता तैयार की जाए। इसी तरह, देश में अलग-अलग टैक्स कानूनों को मिलाकर एक कानून बनाने की मांग भी उठती रही है। संयुक्त श्रम संहिता को लागू करना आसान होगा और इससे असंगठित और संगठित क्षेत्रों के बीच का अंतर भी समाप्त हो जाएगा। हमारे वर्तमान श्रम कानून दोनों क्षेत्रों के बीच अंतर करते हैं। उदाहरणार्थ ठेका श्रम अधिनियम, ठेका श्रम व्यवस्था को मान्यता देता है। संयुक्त श्रम संहिता, सरकारी कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों पर लागू होगी।

संगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकांश लोग उच्च श्रेणी के कार्य कर रहे हैं और वे मध्यम वर्ग से हैं। एक तरह से वे शासक वर्ग के सदस्य हैं। उनका वर्गीय चरित्र, उनकी विचारधारात्मक अभिमुखता में भी झलकता है। ऐसा बताया जाता है कि दक्षिणपंथी भारतीय मज़दूर संघ इस समय देश का सबसे बड़ा श्रमिक महासंघ है। वामपंथी श्रमिक यूनियनों के सदस्य भी चुनावों में दक्षिणपंथी उम्मीदवारों को वोट देते हैं। संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच जो भारी अंतर है, वह इससे स्पष्ट है कि हाल में एक बड़े वामपंथी श्रमिक संगठन ने सप्ताह में केवल पांच कार्यदिवस रखे जाने का प्रस्ताव किया। यह, ऐसे देश में एक क्रूर मज़ाक हैए जहां असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एक महीने में भी एक दिन की छुट्टी नहीं मिलती।

यह घिसीपिटी बात लग सकती है परंतु यह सच है कि केवल एक क्रांतिकारी आंदोलन ही भारतीय श्रमिक वर्ग के इस विभाजन को समाप्त कर सकता है।

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