मजदूर आंदोलन का शुभारम्भ -  राजेश मिश्र

मजदूर आंदोलन का शुभारम्भ -  राजेश मिश्र

मजदूर आंदोलन का शुभारम्भ -  राजेश मिश्र

(राजेश मिश्र,  हिन्दू श्रमिक महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

लखनऊ : भारत में मजदूर संघ का अस्तित्व 19 वी. शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आधुनिक उद्योगों की स्थापना के साथ शुरु होता है। रेलवे का निर्माण इस दिशा में प्रथम कदम था। आधुनिक उद्योगों के उदय के साथ ही कारखानों में अनेक बुराइयां जैसे कि काम करने के अधिक घंटे, आवास की असुविधा, कम वेतन, अत्यधिक असुरक्षा आदि देखने को मिली। कारखानों में सुधार हेतु प्रथम प्रयास समाजसेवी संस्थाओं द्वारा किया गया।
1877 में नागपुर स्थित एम्प्रेस मिल के मजदूरों ने अपने वेतन की दरों के विरुद्ध हङताल का आयोजन किया।
1878 में सोराबाजी शपूर जी बंगाली ने बंबई विधानसभा में श्रमिकों की कार्यावधि के बारे में एक विधेयक पेश करना चाहा लेकिन असफल रहे।
1890 में एन.एम.लोखंडी महोदय ने बंबई मिल हैण्ड्स एसोसिएशन की स्थापना की जिसे आंशिक रूप से भारत का पहला मजदूर संघ माना जाता है।
कामगार हितवर्धन सभा(1990), सामाजिक सेवा संघ(1911),कलकत्ता मुद्रक संघ(1905),भारतीय रेल कर्मचारी एकीकृत सोसाइटी(1897) आदि प्रारंभिक मजदूर आंदोलन से जुङी संस्थायें थी।
प्रारंभिक दिनों में राष्ट्रवादी नेताओं का रुख मजदूर आंदोलन के प्रति उदासीनता का था।
उदासीनता का कारण साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलन था जो अपने पहले चरण में था, राष्ट्रवादी नेता इस समय केवल उन्हीं मुद्दे से लङना चाहते थे।जिसमें समूचे देश की भागीदारी हो।

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