‘गिरमिटिया मज़दूरी’ प्रथा को समाप्त करने में उनकी भूमिका के लिये याद किया जाता है- राजेश मिश्र

‘गिरमिटिया मज़दूरी’ प्रथा को समाप्त करने में उनकी भूमिका के लिये याद किया जाता है- राजेश मिश्र

गिरमिटिया मज़दूरीप्रथा को समाप्त करने में उनकी भूमिका के लिये याद किया जाता है-

राजेश मिश्र

 

(राजेश मिश्र,  हिन्दू श्रमिक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। )

    • मालवीय जी कोगिरमिटिया मज़दूरीप्रथा को समाप्त करने में उनकी भूमिका के लिये याद किया जाता है।

गिरमिटिया मज़दूरीप्रथा बंधुआ मज़दूरी प्रथा का ही एक रूप है, जिसे वर्ष 1833 में दास प्रथा के उन्मूलन के बाद स्थापित किया गया था।

      • गिरमिटिया मज़दूरोंको वेस्टइंडीज़, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रिटिश कालोनियों में चीनी, कपास तथा चाय बागानों और रेल निर्माण परियोजनाओं में कार्य करने के लिये भर्ती किया जाता था।

हरिद्वार के भीमगोड़ा में गंगा के प्रवाह को प्रभावित करने वाली ब्रिटिश सरकार की नीतियों से आशंकित मालवीय जी ने वर्ष 1905 में गंगा महासभा की स्थापना की थी।

वे एक सफल समाज सुधारक और नीति निर्माता थे, जिन्होंने 11 वर्ष (1909-1920) तक 'इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल' के सदस्य के रूप में कार्य किया।

उन्होंने 'सत्यमेव जयते' शब्द को लोकप्रिय बनाया। हालाँकि यह वाक्यांश मूल रूप सेमुण्डकोपनिषदसे है। अब यह शब्द भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।

मालवीय जी के प्रयासों के कारण ही देवनागरी (हिंदी की लिपी) को ब्रिटिश-भारतीय अदालतों में पेश किया गया था।

उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को बनाए रखने की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव से संबंधित विषयों पर भाषण देने के लिये जाना जाता था।

जातिगत भेदभाव और ब्राह्मणवादी पितृसत्ता पर अपने विचार व्यक्त करने के लिये उन्हें ब्राह्मण समुदाय से बाहर कर दिया गया था।

उन्होंने वर्ष 1915 में हिंदू महासभा की स्थापना में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

मालवीय जी ने वर्ष 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की भी स्थापना की थी।

एक पत्रकार के रूप में उन्होंने वर्ष 1907 में एक हिंदी साप्ताहिकअभ्युदयकी शुरुआत की, जिसे वर्ष 1915 में दैनिक बना दिया गया, इसके अलावा उन्होंने वर्ष 1910 में हिंदी मासिक पत्रिकामर्यादाभी शुरू की थी।

उन्होंने वर्ष 1909 में एक अंग्रेज़ी दैनिक अखबारलीडरभी शुरू किया था।

मालवीय जी हिंदी साप्ताहिकहिंदुस्तानऔरइंडियन यूनियनके संपादक भी थे।

वे कई वर्ष तकहिंदुस्तान टाइम्सके निदेशक मंडल के अध्यक्ष भी रहे।

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