अच्युत सामंतः देवदूत बन कोरोना पीड़ितों की सेवा

अच्युत सामंतः देवदूत बन कोरोना पीड़ितों की सेवा

जिस कोरोना काल के शुरू होते भारत के तमाम नेता अपने-अपने आवास में दुबक कर बैठ गये थे और अभीतक अपने घरों से निकलने में डर रहे हैं, उस महामारी से बेखौफ होकर डॉ. सामंत एक कोरोना योद्धा की तरह अपने संस्थान के बच्चों और आम जनता से लेकर प्रशासन तक की हरसंभव मदद करते नजर आ रहे हैं। पिछले 6 महीने के भीतर उन्होंने अपनी ओर से ओडिशा सरकार का समर्थन प्राप्त करते हुए चार-चार कोविद-19 अस्पताल खोले हैं।

घर-घर पहुंचाई पुस्तकें और अनाज

डॉ. सामंत का दावा है कि कोरोना महामारी के दौर में उन्होंने बतौर सांसद और समाजसेवक अपने क्षेत्र के किसी भी शख्स को भूखा नहीं सोने दिया। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। विदित हो कि डॉ. सामंत की तरफ से तकरीबन 30 हजार आदिवासी बच्चों को उनके होमटाउन में न सिर्फ प्रत्येक महीने पाठ्य-पुस्तकें बल्कि सूखा राशन आदि निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। किसी व्यक्ति विशेष द्वारा शायद ही दुनिया के किसी कोने में ऐसी पहल सुनने-देखने को मिली हो।

मुफ्त में पढ़ाएगा कीस

शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने वाले समाजसेवी डॉ. अच्युत सामंत ने कोरोना बीमारी के शिकार व्यक्ति के परिवार के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने इस महामारी से मरने वाले व्यक्ति के बेटे या बेटी द्वारा कीट विश्वविद्यालय में तकनीकी उच्च शिक्षा के लिए इच्छा जताए जाने पर उसे तकनीकी व वृत्तिगत (प्रोफेसनल) शिक्षा मु्फ्त में मुहैया कराने का वादा किया है।

गुपचुप बेचने वाला फ्री में करेगा मैकेनिकल इंजीनियरिंग

कोरोना महामारी के शिकार लोगों के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने का वादा करने वाले डॉ. सामंत का आशीर्वाद उड़ीसा के केंदुझार जिले के आनंतपुर में गुपचुप बेचने वाले बच्चे को मिला। हाल ही में जिसके पिता की मृत्यु कोविड के चलते हो गई थी। राहुल महत की मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई का जिम्मा अब कीस फाउंडेशन ने लिया है। वह अब तकनीकी शिक्षा को कीट जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में बिल्कुल मुफ्त प्राप्त करेगा।

कौन हैं डॉ. अच्युत सामंत

उड़ीसा का कलिंग कहे जाने वाले जाने-माने शिक्षाविद् एवं शिक्षाशास्त्री डॉ. अच्युत सामंत कंधमाल सीट से सांसद हैं। कभी घोर गरीबी में पले-बढ़े अच्युत सामंत आज आदिवासी क्षेत्र के सौ दो सौ नहीं बल्कि 30,000 से ज्यादा गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा, भोजन, आवास और सेहत संबंधी सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। वर्तमान में कीस में ओडिशा के आदिवासी क्षेत्र वाले कुल 23 जिलों के बच्चों का भविष्य संवारने का कार्य होता है। नब्बे के दशक में उनके द्वारा शुरू किए कीस और कीट संस्थान से निकला बच्चा आज शिक्षा ही नहीं खेल की दुनिया में भी पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन कर रहा है।

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