dharam aaj tak:परमात्मा की भक्ति प्रहलाद की तरह करना चाहिये-चतुर्वेदी

dharam aaj tak:परमात्मा की भक्ति प्रहलाद की तरह करना चाहिये-चतुर्वेदी

परमात्मा की भक्ति प्रहलाद की तरह करना चाहिये-चतुर्वेदी
_______________________________
सुमेरपुर हमीरपुर।भागवत पुराण एक आलौकिक ग्रन्थ है जिसमें कर्मयोग, ज्ञानयोग, मानव धर्म, वर्णाश्रम धर्म और भक्तियोग सहित परमात्मा की प्राप्ति के सभी साधनों का वृहद वर्णन है लेकिन इसमें परमात्मा की भक्ति का ही विशेष निरूपण किया गया है।
सुमेरपुर के उदय लान में चल रही भागवत कथा में व्यास आचार्य महेश कृष्ण चतुर्वेदी जी महाराज ने बताया कि जो सत्य, शाश्वत सुख, शाश्वत ज्ञान, शाश्वत जीवन की ओर ले जाये उसी को सत्कर्म कहते है। इसलिये सत्कर्म, सेवा भाव, निस्काम भाव से करे तभी कल्याण होगा। मनुष्य को प्रयत्न के साथ ही पुरुषार्थ करना चाहिये। उन्होने कहा सत्कर्म करने में पहले विघ्न जरूर आते है लेकिन अन्तत: सफलता अवश्य मिलती है। आज समाज के लोग भौतिक सुख के चक्कर में ऐसा भटक गया है कि उसे सही ज्ञान का बोध ही नहीं रह गया है। इससे मुक्ति पाने का केवल एक ही साधन है कि परमात्मा की शरण में जाओ तभी कल्याण होगा| व्यास ने प्रहलाद चरित्र की कथा में बताया कि परमात्मा की भक्ति भक्त प्रह्लाद की तरह करनी चाहिए।कथा की परीक्षित श्रीमती विमला देवी रही। आयोजक बिन्दु शिवहरे व नीलम सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

Loading...