एक अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन : राजेश मिश्र

एक अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन : राजेश मिश्र

एक अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन : राजेश मिश्र
(राजेश मिश्र,  हिन्दू श्रमिक महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)
1881 और 1891 के कारखाना अधिनियमों का राष्ट्रवादी अखबारों और राष्ट्रवादी नेताओं ने इस लिए आलोचना की कि उन्हें इस बात की आशंका थी कि सरकार इन अधिनियमों द्वारा ब्रिटिश उत्पादकों का कल्याण करना चाह रही है, और भारतीय उत्पादों को बाजार से गायब करना चाह रही है।
चूँकि राष्ट्रवादी नेता तीव्र औद्योगिकरण के पक्षधर थे इसलिए औद्योगीकरण के इस दौर में श्रम कानूनों को व्यवधान नहीं बनाना चाहते थे।
मजदूर वर्ग की प्रथम संगठित हङताल ब्रिटिश स्वामित्व वाली रेलों में हुयी।1899 में ग्रेट इंडियन पेनिन सुलार में कार्यरत श्रमिकों ने कम मजदूरी और अधिक कार्यावधि के कारण हङताल कर दी।
मजदूर आंदोलनों परर 1903 से 1908 के बीच चले स्वदेशी आंदोलन का सकारात्मक प्रभाव पङा। स्वदेशी के प्रमुख नेताओं में अश्विनी कुमार दत्त, प्रभातकुमार राय चौधरी,अपूर्व कुमार घोष ने मजदूर आंदोलन को अपना सहयोग प्रदान किया।
16 अक्टूबर,1905 को बंगाल विभाजन के दिन मजदूरों ने समूचे बंगाल में हङताल रखी।
22 जुलाई, 1908 को बाल गंगाधर तिलक को आठ वर्ष की सजा होने के बाद तत्कालीन बंबई के कपङा मजदूर लगभाग एक सप्ताह तक हङताल पर रहे, मजदूरों की यह हङताल उस समय की सबसे बङी राजनीतिक हङताल थी।
बी.पी.वाडिया द्वारा गठित मद्रास मजदूर संघ (1918) भारत का पहला आधुनिक मजदूर संगठन था।
1919 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापनी तथा आई.एल.ओ. में भारत की सदस्यता एवं राष्ट्रवादियों के असहयोग आंदोलन ने भारत में एक अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन के रूप में सामने आया।
1920 में एम. एन. जोशी, जोसेफ बैपटिस्ट तथा लाला लाजपत राय के प्रयासों से अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई।
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष लाला लाजपतराय हुए(1920), यह सम्मेलन बंबई में हुआ था।
 

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