भाजपा का सितारा बुलंद हुआ

भाजपा का सितारा बुलंद हुआ

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

बिहार के चुनाव और मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में हुए उप-चुनावों के स्पष्ट नतीजे अभीतक सामने नहीं आए हैं लेकिन वोटों की गिनती से जो लहरें पैदा हो रही हैं, उनकी ध्वनि यह है कि भाजपा का सितारा अभी भी बुलंद है। भारत के लोगों में मोदी-प्रशासन के प्रति अभी तक थकान पैदा नहीं हुई है। लोगों ने नोटबंदी, जीएसटी, कोरोना की महामारी और बेरोजगारी आदि कई समस्याओं का सामना किया लेकिन मोदी-सरकार के प्रति उसका विश्वास डिगा नहीं।

यह हो सकता है कि बिहार में विपक्ष की सरकार बन जाए, हालांकि उसकी संभावना कम ही है, फिर भी भाजपा को मिल रही बढ़त किस बात का संकेत कर रही है? यह बढ़त इसलिए ज्यादा ध्यातव्य है कि नीतीश की सीटें घट रही हैं, जबकि दोनों पार्टियों ने लगभग बराबर संख्या में अपने-अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। इस वक्त टीवी चैनलों पर वोटों की गिनती से जो अंदाज लगाए जा रहे हैं, यदि वे खरे भी उतरे तो बिहार में सरकार भाजपा और जदयू (नीतीश) की ही बनेगी लेकिन वहां सवाल यह उठेगा कि अब मुख्यमंत्री कौन बनेगा? क्या नीतीश बनेंगे? शायद वे खुद न बनें। वे केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। वे किसी भी वक्त लोकसभा या राज्यसभा में पहुंच सकते हैं। भाजपा ने वायदा किया था कि इसबार नीतीश ही मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन हो सकता है कि भाजपा में ही मुख्यमंत्री पद के कुछ दावेदार उठ खड़े हों। जो भी बिहार का मुख्यमंत्री बनेगा, इसबार उसके सामने चुनौतियां काफी भयंकर होंगी।

हिंदी राज्यों में बिहार का पिछड़ापन सर्वज्ञात है। यदि राजग की सरकार बनती है तो उसे सबल विपक्ष का सामना करना होगा। नीतीश कुमार पिछले 15 साल में जितने अच्छे और उल्लेखनीय काम कर पाए हैं, उतने भी काम राजग सरकार कर पाएगी या नहीं, यह देखना होगा। सरकार किसी की भी बने, भाजपा सत्ता में रहे या विपक्ष में, बिहार में वह सबसे मजबूत शक्ति बन गईं है।

(लेखक सुप्रसिद्ध पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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