34 वाँ कौमी एकता सम्मेलन में नामचीन कवियों ने बाधी शमा,झूम उठे श्रोता

34 वाँ कौमी एकता सम्मेलन में नामचीन कवियों ने बाधी शमा,झूम उठे श्रोता

रिपोर्टःशकीर अख्तर (ब्यूरो चीफ-सोनभद्र)

सोनभद्र। दुद्धी कस्बे के तहसील प्रांगण में सोमवार की रात्रि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा  दुद्धी के तत्वाधान में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें उत्तर प्रदेश के नामचीन कवियों व कवित्रियों गाजीपुर से आयीं रश्मि शाक्या,दुद्धी की असमा बानों, मैनपुरी से आये विनोद राजयोगी, फरुखाबाद से आये पवन बाथम , कुंवर सिंह कुंवर, प्रयागराज से आये राधेश्याम भारती , जौनपुर से आये अमर नाथ गौतम, मुग़लसराय से आये सुहैल उस्मानी ,सोनभद्र के हसन सोनभद्री ,अनपरा से आये कमलेश राजहंस, गाजीपुर से आयीं कवियत्री रश्मि शाक्या,गोरखपुर से आये मनमोहन मिश्र समेत कुल 11 कवियों ने मुशायरा में भाग लिया। शुरुवात में विशिष्ट अतिथि सदर विधायक भूपेश चौबे और कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहें उपजिलाधिकारी सुशील कुमार यादव ने माँ सरस्वती के चित्र का संयुक्त रूप से अनावरण किया ,माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया।उसके बाद कवियत्री रश्मि शाक्य ने ' हे  माँ सरस्वती अभय अस्मित अमरता वरदान दे' सरस्वती वंदना गाकर सम्मेलन की शुरुवात की। कवियत्री  रश्मि ने 'चमन में खिले है फूल तुमने मुस्कुराया क्या' ,कही तुमने प्रणय का गीत कोई गुनगुनाया क्या, को गाया। दुद्धी की कवियत्री आसमा बानों ने अपने कविता में हम साज है,हम पर नाज रखना ,हम भारत के रखवाले हम पर नाज रखना, के बोल पर कविता गाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।विनोद राजयोगी ने ' वह मंदिर उसे घुमाता है , वह मंदिर में ले जाता है सिद्दकी होली खेल रहा वंशीधर ईद मनाता है, के बोल से कौमी एकता की मिसाल पेश की।सुहैल उस्मानी ने जब ख्यालों में आप आते हो, हम कहाँ से भूल जाते है ,तथा हसन सोनभद्री के किसी मछली को पानी स्व निकालो ,मेरी चाहत का अंदाजा लगा लो, खिजा में एक नजर पत्तों पर डालो,चीज क्या हूँ अंदाजा लगा लो के बोल श्रोताओं को इश्क के गहराइयों को समझाने में विशेष योगदान दिया।वहीं कमलेश राजहंस के 'महक उठता है गांव सारा ईद होली पर , मुहर्रम पर बड़ी तादाद में मातम मनाते है के बोल ने कौमी एकता को लेकर श्रोताओ को ओत  प्रोत कर दिया।मनमोहन मिश्र ने  नफरत का जाम मुझसे ढाला ना जाएगा,ये काम मेरे दिल में संभाला ना जाएगा।' के सुनाते ही सम्पूर्ण महफ़िल तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठा।कवियों ने एक बढ़कर एक कविताओं और मुशायरों से पूरी रात महफ़िल को बांधे रखा लोग पूरी रात अपने जगह से हिले तक नही।सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि मेरा पैतृक गांव हिराचक है और मैं यहीं पला बढ़ा हूं।जो कौमी एकता कवि सम्मेलन और मुशायरा के पिछले 34 वर्षों से दुद्धी में आयोजन चला आ रहा है दुद्धी क्षेत्र के परम्पराओ का नतीजा है जो हम इस पद पर आसीन हुए है । अध्यक्षता कर रहे उपजिलाधिकारी सुशील यादव ने कहा कि अभी तक के सेवाकाल में जो गंगा जमुनी तहजीब और कौमी एकता यहां देखने को मिली वह कही नही मिली चाहे वह जन्माष्टमी का पर्व हो या मोहर्रम का दोनों समुदायों के लोगों का त्योहारों को सकुशल सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
 कौमी एकता कवि सम्मेलन के अध्यक्ष रामलोचन तिवारी ने कहा कि इसकी शुरुवात 34 साल पूर्व भगवान सिंह व डॉ पीएन सिंह के अथक प्रयास से हुई थी आज इस कार्यक्रम का 34 वर्ष की  यात्रा में देश का कोई कवि नही बचा होगा जो यहां नही आया हो।देर रात पहुँचे कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि पूर्व एमएलसी विनीत सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन यहां के कौमी एकता की मिसाल है जिसके आयोजन में सभी समुदाय के लोग मिलजुलकर सहभागिता निभाते है।अंत में अध्यक्ष  रामलोचन तिवारी ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया।संचालन आलोक अग्रहरि ने किया सहयोगी की भूमिका में अविनाश गुप्ता ने निभाई। कार्यक्रम के उपाध्यक्ष कमलेश सिंह कमल ,सचिव शिवशंकर प्रसाद , कोषाध्यक्ष मदन तिवारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में भरपूर योगदान दिया।इस मौके पर कुलभूषण पांडेय, रामेश्वर रॉय , जुबेर आलम , विजेंद्र श्रीवास्तव ,कमल कुमार कानू ,संतोष सिंह कांट्रेक्टर , हरिशंकर यादव , दिनेश यादव ,नारद पटेल , क्राइम इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश यादव के साथ हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहें।

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