एक सुखद अहसास और देश की बुनियादी ज़रूरत संकल्प शिक्षा मिशन

एक सुखद अहसास और देश की बुनियादी ज़रूरत संकल्प शिक्षा मिशन

ग़ाज़ियाबाद : पुनीत माथुर। एक सभ्य,शिक्षित, सुशील और सुदृढ नागरिक बनना व बनाना सच्चा मानवतावादी दृष्टिकोण है । 

अनपढ, कामगार व  घर-घर में  झाडूपोछा लगाने वाली गरीब महिलाएं भी आज साक्षर हो जाना चाहती हैं । बस जरूरत है उन्हे एकजुट करने की। 

5 सितम्बर 2019 से इस प्रौढ़  शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत हुई और एक के बाद एक कामगार महिलाएं आने लगीं।

"हमे भी पढना है, हमका भी कापी पेन्सिल दीहै ....अपन नाम लिखना सीखिहै"', कितनी लगन और उत्साह है इनमें।  इनके  पति भी प्रेरित हुए हैं  इनकी पढाई से। 

सप्ताह में 5 दिन पढाई और 2 दिन एक्टिविटी ... नाच - गाना, खेलकूद। 

ये सब कहाँ हो रहा है ? कौन है इनके साथ ? ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम के एक बड़े पार्क में चल रहा है ये अभियान और इस अभियान का कुशल संचालन कर रही हैं जया प्रयास हेल्प फाऊंडेशन की संस्थापक जया बत्रा।  

गरीब व अनपढ़ महिलाओं के लिए बेहद चिंतित, इनकी अपनी पहचान के लिए, एक सक्षम व्यक्तितव के लिए, अपने इधर-उधर फ़ालतू घूमते बच्चों की अच्छी तालीम के लिए। इन महिलाओं को धीरे-धीरे सुघड़ राह पर ला रही हैं जया। 

रोज़ सुबह इन गरीब महिलाओं के  150 बच्चों को दूध पिलाने से पाठशाला शुरू होती है और 12-1 बजे भोजन परोसा जाता है जो आसपास के सुधी और समाजसेवी लोगों की सहायता से उपलब्ध होता है। 

पास की ही एक सोसायटी से एक परिवार रोजाना बच्चों के लिए बिस्किट ले आता है।त्यौहार पर खाने के साथ आस - पड़ोस के परिवारों से हलवा -खीर भी आ जाती है।

बस जया बत्रा तो ये ही कहती हैं, "मैं अकेली ही चली थी जानिबेमंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया"।

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