अनाथालय में 3 साल की भूखी बच्ची को गर्म चिमटे से जलाया

अनाथालय में 3 साल की भूखी बच्ची को गर्म चिमटे से जलाया

वाराणसी. अभी संस्कृत विद्यालय में छात्र संग अप्राकृतिक दुष्कर्म का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब अनाथालय में पल रही 3 साल की बच्ची को गर्म चिमटे से दागने का मामला सामने आया है। ताज्जुब तो यह कि दोनों ही मामलों को दबाने की कोशिश की गई लेकिन कहीं न कहीं से भेद खुलने पर प्रशासन हरकत में आया और कार्रवाई की। अनाथालय में बच्ची को गर्म चिमटे से दागने के प्रकरण में प्रथम द्रष्ट्या दोषी पाये जाने पर वार्डेन को बर्खास्त कर दिया गया है। एफआईआर दर्ज हो गई है। बताया जा रहा है कि बच्ची भूखी थी और कुछ खाना मांग रही थी।
बता दें कि पिछले करीब दो दशक से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चला रही सामाजिक संस्था "आगमन" से किसी ने काशी अनाथालय में 3 साल की बच्ची को गर्म चिमटे से दागे जाने की सूचना दी। ऐसे में बच्चियों की खातिर से संघर्षरत संस्था के संस्थापक डॉ संतोष ओझा ने इसकी शिकायत डीएम सुरेंद्र सिंह से की। डीएम ने फौरन प्रोबेशन अधिकारी को मौके पर भेजा। प्रोबेशन अधिकारी ने जांच के बाद प्रथम द्रष्ट्या दोषी पाए जाने पर वार्डेन के खिलाफ चेतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। साथ ही वार्डेन को बर्खास्त कर दिया। बच्ची को इलाज के लिए मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत में सुधार है।
इस पूरे प्रकरण में प्रोबेशन अधिकारी प्रवीण त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि अनाथालय में 47 बच्चियां हैं। उसमें कुछ बड़ी और कुछ छोटी बच्चियां हैं। खेल-खेल में किसी बड़ी बच्ची ने तीन साल की बिटिया के पिछले हिस्से में गर्म चिमटे से दागा है। भागा दौड़ी में कुछ हुआ था जिस पर बड़ी बच्ची रसोई में गई, उस वक्त रसोई में खाना बन रहा था। ऐसे मे रोटी सेंकने के उपयोग में लाने जाने वाला चिमटा जो गर्म था वह लेकर आई और उससे छोटी बच्ची को दाग दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि अनाथालय में वार्डेन हैं और सभी बच्चियों की हिफाजत की जिम्मेदारी उनकी बनती है लिहाजा इस मामले में दायित्व निर्वहन में लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही बर्खास्त कर दिया गया है। बताया कि अनाथालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण कुमार सिंह की तहरीर पर चेतगंज थाने में वार्डेन के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
लेकिन इस मामले में आगमन संस्था के संस्थापक डॉ संतोष ओझा ने बताया कि उन्हें जो जानकारी मिली उसके अनुसार घटना 4 सितंबर की है। उसके बाद से 9 सितंबर तक बच्ची को न अस्पताल ले जाया गया न ही उसका कोई इलाज हुआ। इस पूरे मामले को छिपाने-दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना देने वालों ने बताया कि बच्ची भूखी थी, वह कुछ खाने की मांग कर रही थी, बार-बार मना करने के बाद भी वह खाने की जिद पर अड़ी थी ऐसे में वार्डेन ने ही उसके हिप पर गर्म चिमटे से दाग दिया।
डॉ ओझा ने बताया कि प्रशासन ने इस मामले में भले ही वार्डेन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई हो या वार्डेन को बर्खास्त किया हो लेकिन वह पूरे मामले में लीपापोती करने में जुटा है। बताया कि जानकारी के मुताकबिक घटना 4 सितंबर की है और 7 सितंबर को जिला प्रोबेशन अधिकारी की टीम ने अनाथालय की जांच की थी और सब कुछ ठीक पाया था जबकि 9 सितंबर को आगमन ने बच्ची को गर्म चिमटे से दागने की घटना का खुलासा किया। ऐसे में प्रोबेशन विभाग अपनी कमी को छिपाने के लिहाज से इसे बच्चियों के खेल-खेल का मामला बता कर मामले को रफा-दफा करने में जुटा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की लिखित शिकायत वह मुख्यमंत्री से करेंगे।

 मासूम से अप्राकृतिक दुष्कर्म के आरोप में प्रधानाचार्य व वार्डेन जा चुके हैं जेल 
बता दें कि अभी तीन दिन पहले ही काशी के अस्सी स्थित मुमुक्षु भवन परिसर में स्थित एक संस्कृत महाविद्यालय के छात्रावास में मासूम बच्चे संग अप्राकृतक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इतना ही नहीं बच्चे के विरोध पर उसकी पिटाई भी की गई थी। यह मामला 30 अगस्त का था जिसे दबाने की कोशिश की गई लेकिन छात्र की पिटाई का वीडियो वायरल होने पर क्षेत्रीय लोगों के धरना-प्रदर्शन के बाद पुलिस हरकत में आई और छात्र के पिता की तहरीर पर केस दर्ज कर कार्यवाहक प्रधानाचार्य त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल व वार्डेन राम प्रसाद द्विवेदी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

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