क्या ओबामा जैसे भारत हितैषी हो पाएंगे ट्रम्प.....?

क्या ओबामा जैसे भारत हितैषी हो पाएंगे ट्रम्प.....?

(ओमप्रकाश मेहता)
अमेरिका में नेतृत्व बदलने के बाद भारत व अमेरिका के नए नेतृत्व के बीच नए सम्बंधों का श्री गणेश मोदी-ट्रम्प की प्रस्तावित यात्रा से होने जा रहा है। लेकिन दोनों देशें के सम्बंधों पर काफी समय से नजर रखने वाले देशों के बीच आज यह कानाफूसी हो रही है कि ’क्या अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति बराक ओबामा जैसे भारत हितैषि हो पाएगें?‘ यह सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि ओबामा शुद्ध राजनेता थे और वर्तमान राष्ट्रपति ट्रम्प एक जाने-माने उद्योगपति है। एक राजनेता और एक उद्योगपति के आचार व्यवहार में जो स्वाभाविक अंतर होता है, वह तो अमेरिका के पूर्ववर्ती और वर्तमान राष्ट्रपति के बीच संभव है, क्योंकि राजनेता एक बार सम्बंधों को महत्व दे सकता है, लेकिन व्यापारी या उद्योगपति तो अपना हित ही देखेगा इसमें कोई दो राय नही हो सकती।
यद्यपि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी डोनाल्ड ट्रम्प से 26 जून को व्हाईट हाउस में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा करेंगे, इसकी एक लम्बी सूची वे अपने साथ लेकर जा रहे है, किंतु इसमें भी दो राय नहीं कि ट्रम्प अपनी रूचि के मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे और मोदी जी अपने देशहित के मुद्दों पर। ट्रम्प की रूचि जहां भारत में चीन का कारोबार घटाकर अमेरिकी कारोबार बढ़ाने में हो सकती है, वहीं मोदी जी की रूचि एच-1बी वीसा पर अमेरिकी बंदिश और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद व पाकिस्तान विवाद होगी। यद्यपि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार पूर्व की अपेक्षा छ गुना बढ़ा है, सन 2000 में जहां अमेरिका-भारत के बीच 19 अरब डॉलर का व्यापार होता था वह आज बढ़कर 115 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, किंतु ट्रम्प की नजर तो भारत-चीन के बीच हो रहे 347 अरब डॉलर के व्यापार पर है। अमेरिका चाहता है कि भारत में जो चीन 347 अरब डॉलर का कारोबार कर रहा है, उसे वह हथिया ले।
इस व्यापारिक मुद्दे के अलावा यदि भारत और अमेरिका किसी एक मुद्दे पर एक साथ है, तो वह है आतंकवाद का खात्मा। वैसे तो इस मुद्दे पर ट्रम्प और मोदी फोन पर कई बार बात कर चुके है, लेकिन अब वे दोनों एक साथ व्हाईट हाउस में गंभीर चिंतन कर और अपने-अपने प्लॉन साझा कर कोई ऐसा आतंकवाद विरोधी साझा कदम उठाने का ऐलान कर सकते है, जिससे कि पाकिस्तान जैसे आतंकवाद पोषक देशों को कुछ सबक मिल सके, क्योंकि आतंकवाद विरोधी पहल का सबसे बड़ा सहभागी देश भारत ही है और विश्व के अनैक देशों ने भारतीय प्रधानमंत्री की इस पहल का दिल से सम्मान भी किया है। यद्यपि ऐसी चर्चा है कि ट्रम्प ने आतंकवाद के खात्में के लिए एक विषद योजना तैयार की है, जिसे फिलहाल उजागर नहीं किया गया है, हो सकता है मोदी जी से चर्चा के बाद वह विश्वहितैषी योजना भी विश्व के सामने आ जाए?
यद्यपि मोदी-ट्रम्प के बीच चर्चा हेतु जो मुद्दे तैयार किए गए है, उनमें संभव है अधिकांश पर दोनों देशों के प्रधानों की सहमति हो, किंतु कुछ मुद्दे ऐसे भी है, जिनसे अमेरिका सहमत न हो, उनमें से एक प्रमुख मुद्दा एच-1बी वीसा का भी है, जिसे प्राप्त कर भारत के एक करोड़ युवा अमेरिका में कई बरसों से रोजगार (नौकरी) कर रहे है। ट्रम्प ने अपने चुनाव के वक्त ही वहां के नौजवान वोटरों को लुभाने के लिए एच-1बी वीसा पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया था, और सत्ता में आने के बाद ट्रम्प ने उस वादे को मूर्तरूप भी दे दिया और इसी कारण अमेरिका में कार्यरत एक करोड़ युवाओं पर बेरोजगारी की तलवार लटका दी गई है। मोदी जी की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि ये युवा बेरोजबार होकर भारत आ गए तो फिर भारत की क्या स्थिति होगी? इसीलिए मोदी जी ने इस मुद्दे को ट्रम्प से चर्चा की सूची में सबसे ऊपर रखा है।
इसके साथ ही रक्षा सहयोग, चीन की दबंगाई, पाकिस्तानी आतंकवाद, पेरिस समझौता, जलवायु समझौता, आदि कई अहम मुद्दें है, जिन पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच गंभीर चिंतन के बाद निर्णयात्मक फैसले लिए जाना है और इन्हीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के कारण पूरे विश्व की नजर मोदी-ट्रम्प की चर्चा व उसके परिणामों पर टिकी है।
अब यह तो भविष्य के गर्भ में है कि इस शिखरवार्ता का परिणाम क्या होगा? और भारत के हित से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति का रूख क्या होता है? वे उन्हें तवज्जौ देते भी है या नहीं? और फिर मोदी जी किस ’मूड‘ में भारत लौटते है? किंतु यह तो तय है कि अब न तो ट्रम्प और मोदी के बीच बराक ओबामा जैसे दोस्ताना सम्बंध स्थापित हो सकते है और न मोदी जी अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके पहले नाम से सम्बोधित ही कर पाएगें, क्योंकि पहले बड़े देश के मोदी से कम उम्र के राष्ट्रपति थे और अब बड़े देश के ’बड़े‘ राष्ट्रपति है। फिर भी फिलहाल उम्मीद तो यही कि जा सकती है कि मोदी-ट्रम्प की यह भेंट एक नए सम्बंधों के इतिहास को जन्म देगी।

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