लोक सभा अध्यक्ष ने युवाओं से राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण रखते हुए विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया

नई दिल्ली; लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह; केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री  जे. पी. नड्डा; केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; राज्य सभा में विपक्ष के नेता  मल्लिकार्जुन खरगे; राज्य सभा के उपसभापति  हरिवंश;  नितिन नवीन और सोनिया गांधी सहित संसद सदस्य; पूर्व सांसद तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।लोक सभा के महासचिव  उत्पल कुमार सिंह तथा राज्य सभा के महासचिव  पी.सी. मोदी और लोक सभा एवं राज्य सभा सचिवालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी गणमान्य व्यक्तियों के साथ सरदार पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित किए।इस अवसर पर अपने संबोधन में बिरला ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन एवं आदर्शों से प्रेरणा लें तथा अपनी क्षमताओं, नवाचार और सामूहिक प्रयासों को भारत की राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को सुदृढ़ करने और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित करें।सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर संविधान सदन में विभिन्न राज्यों से आए युवा विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए  बिरला ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी और आधुनिक भारत की राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार का जीवन दृढ़ संकल्प, असाधारण संगठनात्मक कौशल, दूरदृष्टि और निर्णायक नेतृत्व का अनुपम उदाहरण है। राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार पटेल के असाधारण योगदान का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष महोदय ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अनेक चुनौतियों और विषम परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्र के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के बल पर लगभग 560 रियासतों का भारतीय संघ में विलय संभव हो सका। आज भारत की जो एकता एवं अखंडता हमें दिखाई देती है, वह उनके नेतृत्व और दूरदर्शी सोच की अविस्मरणीय देन है। उन्होंने संवाद स्थापित करने, आवश्यकता पड़ने पर दृढ़ निर्णय लेने तथा साझा राष्ट्रीय उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी को साथ लेकर चलने की सरदार पटेल की अद्भुत क्षमता का भी उल्लेख किया।संविधान सदन में युवा प्रतिभागियों के साथ हुए संवाद का उल्लेख करते हुए  बिरला ने उनकी विचारशीलता, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और नवाचार की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न भागों से आए युवाओं द्वारा व्यक्त किए गए विविध विचार और दृष्टिकोण भारतीय लोकतंत्र की अंतर्निहित शक्ति को दर्शाते हैं। हमारी भाषाएँ, राजनीतिक प्राथमिकता और विचार भले ही अलग-अलग हों, लेकिन राष्ट्रीय एकता तथा देश के व्यापक हितों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता साझा और सर्वोपरि रहनी चाहिए। लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान सदन भारत की राष्ट्रीय यात्रा में विशेष स्थान रखता है। यह भवन स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय संविधान के निर्माण का साक्षी रहा है। देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास तथा नए भारत के निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विचार-विमर्श और निर्णयों का भी यह ऐतिहासिक केंद्र रहा है।

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उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस ऐतिहासिक संस्थान से विचारों, दृष्टिकोणों और प्रेरणा की पूंजी लेकर जाने वाले युवा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सार्थक योगदान देंगे।राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी पर बल देते हुए श्री बिरला ने कहा कि महान विभूतियों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपने त्याग और योगदान से देश को आजादी दिलाई तथा नए भारत की नींव रखी। अब युवा पीढ़ी का दायित्व है कि वह राष्ट्र को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शक्ति, ज्ञान और संसाधनों की प्रचुरता, आत्मविश्वास तथा नवाचार की क्षमता से परिपूर्ण भारत के युवाओं के सामने विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक योगदान देने के अपार अवसर हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी रचनात्मकता, आध्यात्मिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी क्षमताओं को राष्ट्रसेवा की दिशा में नियोजित करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में कार्यरत युवाओं के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए तथा देश के नेतृत्व और युवाओं के सामूहिक प्रयास विश्व का नेतृत्व करने वाले भारत के स्वप्न को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।युवा प्रतिभागियों द्वारा साझा किए गए विचारों से देशभर के युवाओं में नई ऊर्जा, नई दिशा, नया दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का संचार होने की आशा व्यक्त करते हुए श्री बिरला ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी को सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदृष्टि, कठोर परिश्रम, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास जैसे गुणों को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन गुणों से युक्त युवा भारत को विश्व में परिवर्तन का वाहक बनाने तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम होंगे।

इससे पूर्व, आज दिन में  बिरला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा:

“भारत के लौह पुरुष और भारत रत्न से सम्मानित सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती पर मैं उस महान दूरदर्शी नेता को हृदय से नमन करता हूँ, जिनके अटूट संकल्प और असाधारण नेतृत्व ने हमारे राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता को नई दिशा प्रदान की।स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने से लेकर स्वतंत्र भारत की नियति को आकार देने तक, सरदार पटेल जी का राष्ट्र के प्रति योगदान अतुलनीय और अविस्मरणीय है। स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के रूप में उन्होंने नवस्वतंत्र राष्ट्र के समक्ष उपस्थित सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सफलतापूर्वक समाधान किया। 562 से अधिक रियासतों के एकीकरण में उनकी निर्णायक भूमिका रही। उनके असाधारण नेतृत्व, राजनीतिक दूरदृष्टि और अदम्य इच्छाशक्ति ने एक सशक्त एवं एकजुट भारत की नींव को और मजबूत किया।सरदार पटेल जी की दृष्टि केवल स्वतंत्रता प्राप्ति तक सीमित नहीं थी; वे एक ऐसे सशक्त, आत्मनिर्भर और समरस राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे, जहाँ विविधता हमारी शक्ति हो और राष्ट्रीय एकता हमारी विशिष्ट पहचान। उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाना हमें अपने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रति सामूहिक दायित्व का स्मरण कराता है। आइए, उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक सशक्त, समरस और विकसित भारत के निर्माण में पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ योगदान देने का संकल्प लें।”

https://x.com/ombirlakota/status/2116385204629877077

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