सन् 2000 से ही यह व्याख्यान प्रतिवर्ष होता है। अभी तक यह जयपुर में होता रहा, इस वर्ष एन.डी.एम.सी. कन्वेशन हॉल, दिल्ली में सम्पन्न हुआ।मुख्य व्याख्यानकर्ता विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने कहा कि ‘सामाजिक समरसता एवं एकात्म मानववाद’ एक सामायिक एवं प्रासंगिक विषय है। समाज में व्याप्त ऊँच-नीच का भाव, अस्पृश्यता एवं जातीय अहंकार ये वे दोष हैं जो सामाजिक समरसता को भंग करते हैं तथा द्वेषमूलक असमानता का सृजन करते हैं। डॉ. अम्बेडकर का उदाहरण देते हुए उनकी दी गयी ताड़नाओं का श्री आलोक ने विशद वर्णन किया लेकिन उन्होंने कहा यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके ब्राह्मण अध्यापक ने उन्हें अपना सरनेम ‘अम्बेडकर’ दिया था। शाहू जी महाराज एवं बड़ोदा साया जी राव गायकवाड़ ने उन्हें सम्मानित एवं सबल बनने के लिए हर प्रकार की सहायता की थी।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette
उन्होंने तमिलनाडु व कर्नाटक के भक्त कवियों का तथा संत शिरोमणि रैदास महाराज क विस्तार से उल्लेख किया।
गुरुजी (मा. स. गोलवलकर) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल बुद्धि का नहीं मन का विषय है। सवर्ण कहे जाने वाले बन्धुओं को आत्मालोचनपूर्वक अपना मन ठीक करना होगा।
व्याख्यान के पूर्व प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने विषय की प्रस्तावना रखी। उन्होंने कहा ब्रह्म ही सत्य है तथा सब कुछ ब्रह्म ही है। अतः ऊँच-नीच आदि का भेद तत्वतः मिथ्या है। इस मिथ्यत्व से मुक्त होने के लिये दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानवदर्शन का व्याख्यायन किया।समारोह में बड़ी संख्या में विद्वान लोग उपस्थित थे। ऋषिहुड विश्वविद्यालय के डॉ. सम्पूणानंद मिश्र की पुस्तक ‘सनातन दृष्टि’ का लोकार्पण हुआ। पद्म पुरस्कारों से सम्मानित श्री रामबहादुर राय, डॉ. भरत गुप्त एवं डॉ. जे. एस. राजपूत ने यह लोकार्पण सम्पन्न किया। विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, शिक्षक, उद्योजक, पत्रकार, साहित्यकार, राजनीतिकर्मियों तथा सभी के सभी वर्गों विशेषकर अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा पसमांदा मुसलमानों की इस कार्यक्रम में उपस्थिति रही। विश्व हिंदू परिषद, स्वदेशी जागरण मंच, ग्राहक पंचायत, स्त्री शक्ति, भारतीय मजदूर एवं किसान संघ के साथ ही विविध संगठनों का प्रतिनिधित्व रहा।
प्रारम्भ में श्रीमति अदिति ने वंदेमातरम् का गान तथा अंत में राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया।
डॉ. जंग बहादुर गुप्त
सचिव एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान