‘‘अभी उम्मीद जिन्दा है’’- देगी नई पीढ़ी को प्रेरणा- हरिवंश जी

चन्द्र कुमार तिवारी 
गाजीपुर। 1977 में गाजीपुर से सांसद रहे गौरी शंकर राय की स्मृति में एक संस्था है, गौरी शंकर राय स्मृति संस्थान करनई बलिया और कई बड़े अखबारो मे संवाददाता से सम्पादक तक का सफर तय कर चुके गाजीपुर के धीरेन्द्रनाथ श्रीवास्तव के प्रयास से एक पुस्तक आयी है, ’’अभी उम्मीद जिन्दा है’’ 330 पेज की इस पुस्तक में सम्पादक है धीरेन्द्रनाथ श्रीवास्वत और प्रकाशक है गौरीशंकर राय स्मृति संस्थान। समाजवादी आन्दोलन के गौरव 86 वर्षीय सगीर अहमद इस पुस्तक के नायक है। 

सहसवान, बदायूं के सपूत सगीर साहब के सफरनामे पर आधारित इस पुस्तक का विमोचन उपसभापति राज्यसभा श्री हरिवंश जी ने किया और कहा कि वर्तमान में दुनिया तकनीक की ओर बड़ी तेजी से भाग रही है लेकिन उसे अपना बेहतर रूप बचाए रखने के लिए विचार और मूल्यों की ओर लौटना ही होगा। इसके बगैर दुनिया का कल्याण संभव नहीं है। दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हाल में गौरीशंकर राय स्मृति समिति के तत्वाधान में – सगीर अहमद का सफरनामा – अभी उम्मीद जिंदा है – पुस्तक का लोकार्पण करते हुए श्री हरिवंश जी ने कहा कि बायोटेक, इन्फोटेक और बाजार मिलकर हमारी सभ्यता, सृष्टि के समक्ष बहुत बड़ा खतरा पैदा कर रहें हैं। विचारों और मूल्यों के आधार पर ही इस खतरे का मुकाबला किया जा सकता है।  प्रोफेसर आनन्द कुमार, राजकुमार जैन, सन्तोष भारती, राजनाथ शर्मा, कुर्बान अली और धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव को विशेष रूप से उद्धरित करते हुए समारोह में शामिल सभी बुद्धिजीवियों से राज्यसभा के उपसभापति ने अपील किया कि हम सभी लोगों को इस दिशा में सोचना चाहिए कि समाज विचारों और मूल्यों की ओर कैसे राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि समाजवादी चिन्तक सगीर अहमद के जीवन का हर पल नई पीढ़ी को प्रेरणा देने वाला है।

अभी उम्मीद जिन्दा है- पुस्तक में उनकी इस प्रेरणा पूर्ण जिंदगी को ठीक से सजोया गया है। इस पुस्तक में राजनीतिक इतिहास की बहुत सी ऐसी बाते हैं जिसे पढ़कर नई पीढ़ी बहुतों के बारे में ठीक से अवगत हो पाएगी। पुस्तक के अलग अलग खण्डों की चर्चा करते हुए राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश जी ने कहा कि अभी उम्मीद जिन्दा है, का हर अध्याय सकारात्मक दृष्टि देने वाला है। इसके लिए उन्होंने गौरीशंकर राय स्मृति समिति और सम्पादक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की जमकर तारीफ की और कहा कि इस पुस्तक को पढ़कर नई पीढ़ी एक संवेदनशील और सुखद समाज के गठन में अपनी महती भूमिका निभाए। पुस्तक के सम्पादक धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि सगीर अहमद समाजवादी आंदोलन के अद्वितीय योद्धा हैं। उन्हें मिला कुछ नहीं, लेकिन वह चलते रहे। वह कभी डिगे नहीं। वह 86 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय है। उनकी यह सक्रियता हमें वर्तमान दौर की चुनौतियों से जूझने के लिए ताकत प्रदान करती है और हमारी उम्मीद को जिंदा रखती है। इस अवसर पर समाजवादी विचारक रघु ठाकुर ने कहा कि सगीर साहब में डॉ राममनोहर लोहिया की वैचारिक प्रखरता, आचार्य नरेंद्र देव की गंभीरता और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की उदारता के तीनों गुण विद्यमान है। आज के दौर में इनके जैसे विचारक से तमाम नाउम्मीदी में उम्मीद की लौ दिखती है। प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि सगीर साहब से मेरा रिश्ता तीन पीढ़ियों का है। समाज को विषमता से समता और विपन्नता से संपन्नता की ओर ले जाने का सपना तो लाखों लोगों की पसंद और जरुरत है लेकिन इसके लिए छात्र जीवन से वृद्धावस्था तक जुटे रहना बगैर सिद्धांत में आस्था और स्वयं के आत्मविश्वास के नहीं हो सकता। और ऐसा केवल सगीर साहब ही कर सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने कहा कि सगीर साहब ने स्वतंत्रता संग्राम को देखा है और वे स्वराज को सुराज के रूप में देखते हैं, इसलिए उनका स्वाभाविक विचार समाजवाद रहा है। प्रोफेसर राजकुमार जैन ने सागीर साहब के साथ अपने अनुभवों को याद किया और कहा कि सागीर साहब के आचार-व्यवहार-विचार हमेशा ऊर्जा के स्रोत रहे हैं। समारोह को समाजवादी योद्धा राजनाथ शर्मा, पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब, पूर्व विधायक शौलत अली, पूर्व विधायक टीपी शुक्ला, पूर्व विधायक प्रमोद पाठक, समाजसेवी दीनानाथ शास्त्री आदि ने सम्बोधित किया और कहा कि सगीर साहब का जीवन सामाजिक व राजनीतिक जीवन में त्याग और रिश्तों के निर्वहन का पर्याय है। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता पूर्व सांसद रामजी लाल सुमन ने की और कहा कि आज हमारी राजनीति में दो परंपराएं प्रबल है। एक तरफ ऐसे लोगों की लंबी कतार है, जो इसे स्वार्थ सिद्धि और धन संचय का रास्ता बना चुके है। दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग है जो राजनीति को नागरिक धर्म की तरह निभाते हैं। ये वैसे लोग है जो राजनीति में कुछ पाने के बजाय अपनी तरफ से कुछ देने की परंपरा के वारिस बने हैं, उन्हीं में से एक है सगीर साहब। समारोह में आए अतिथियों का स्वागत समारोह का संयोजक शिवकुमार राय ने किया और कहा कि यह पुस्तक एक सामाजिक ऋषि के जीवन की आत्मकथा है।

लोकार्पण समारोह का संचालन समाजवादी धारा के वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने किया और सगीर साहब के जीवन की घटनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर सर्वश्री चन्द्रभाल त्रिपाठी, पूर्व सांसद दाऊद अहमद, सरदार देवेंद्र सिंह, एम ए अब्बासी, राजीव रंजन राय, सूर्यभान राय सतीश राय, शारदा नन्द राय, रामनाथ ठाकुर, सरदार देवेंद्र सिंह, पूर्व जिला जज बीडी नकवी, पारस नाथ राय, रुस्तम राय, विकास राय, डाक्टर फैजुर्रहमान, प्रोफेसर शाकिर जमील, शुएब नकबी, डाक्टर रईस, शेखर, शैलेन्द्र सिंह, जितेंद्र तिवारी, अभयशंकर राय और विश्वनाथ ठाकुर आदि विशेष रूप सक्रिय थे। वरिष्ठ पत्रकार राधेकृष्ण, महेंद्र सिंह, राजेश राय, राजेश श्रीवास्तव ने सम्पादक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव को उनकी पांचवी पुस्तक सगीर साहब का सफरनामा- अभी उम्मीद जिन्दा है, के लिए बधाई दी। धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव द्वारा सम्पादित अन्य चार पुस्तकें हैं, राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर, राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक, राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक भाग दो और लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed