क्या ईरान से तेल का आयात पूरी तरह बंद करेगा भारत?

इन दिनों अमेरिका ईरान से तेल आयात पर ४ नवंबर से प्रतिबंध लगाने जा रहा है। जिससे विश्व की अर्थव्यवस्था पूरी तरह परिवर्तित होती नजर आ रही है। अमेरिका अपनी दादागिरी सभी पर चलाना चाहता है और वह चाहता है कि भारत भी इस प्रतिबंध को पूरी तरह सफल बनाने में सहयोग दें। लेकिन देखना यह है कि क्या भारत अमेरिका के दबाव में आता है या अपने फायदे को ध्यान में रखकर ईरान से तेल का आयात करता रहता है।

वैसे ईरान काफी सारी सहूलियतों के साथ भारत के साथ पेश आता है। वहीं अमेरिका चाहता है ईरान से कोई भी देश तेल ना खरीदें। ईरान से निर्यात होने वाले तेल की सबसे ज्यादा खरीद चीन करता है जो कुल तेल का ३५ फीसदी है, वहीं भारत ईरान का २७ फीसदी तेल खरीदता है।

वैसे ईरान काफी सारी सहूलियतों के साथ भारत के साथ पेश आता है। वहीं अमेरिका चाहता है ईरान से कोई भी देश तेल ना खरीदें। ईरान से निर्यात होने वाले तेल की सबसे ज्यादा खरीद चीन करता है जो कुल तेल का ३५ फीसदी है, वहीं भारत ईरान का २७ फीसदी तेल खरीदता है।

इसके अलावा ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध चार नवंबर से लागू होंगे. अमेरिका चाहता है कि इसके बाद ईरान से कोई भी देश तेल न खरीदे. अगर ईरान से तेल खरीदने वाले देशों की बात करें तो इनमें चीन पहले नंबर पर आता है. वह ईरान से निर्यात होने वाले कुल तेल का 35 फीसदी हिस्सा खरीदता है.  ईरानी तेल के खरीददारों में भारत 27 फीसदी तेल खरीदता है. इसके अलावा तेल खरीदारों में दक्षिण कोरिया, तुर्की, इटली और जापान का नाम भी शामिल है।

क्या ये देश ईरान से तेल आयात करना बंद कर देंगे? यह समय बताएगा लेकिन चीन ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तेल का आयात बंद नहीं करेगा। यूरोपीय देश भी अमेरिका के पक्ष में जाते नहीं दिखते हैं लेकिन अमेरिका अपने पक्ष में करने में जुटा पड़ा है। तुर्की भी ईरान से ही तेल खरीदने के पक्ष में नजर आता है लेकिन दक्षिण कोरिया और जापान अमेरिका के साथ प्रतिबंध को सफल बनाते हुए उनके साथ जा रहे हैं। अगर इस हालात में भारत उनके साथ जाता है। तो इससे ईरान को नुकसान हो सकता है लेकिन भारत को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

गौर करने की बात तो यह है कि अगर भारत अमेरिका से तेल खरीदता है तो उसे डॉलर में भुगतान करना पड़ेगा और डॉलर लगातार मजबूत हो रहा, हर रोज डॉलर की कीमत बढ़ रही है ऐसे में भारत को सौदा महंगा पड़ेगा साथ ही ईरान तेल का भुगतान रूपया में करवाता है और साथ ही भुगतान में अनेक तरह की सहूलियतें भी देता है। खास बात तो यह है कि अमेरिकी प्रतिबंध से तेल की कीमतें और बढ़ सकती है। अगर तेल की कीमतें अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर बढ़ेगा तो तेल की कीमत और बढ़ जाएगी। जो कि भारत के लिए एक नई मुश्किल को जन्म दे सकता है।

 

खास बात तो यह है कि अमेरिकी प्रतिबंध से तेल की कीमतें और बढ़ सकती है। अगर तेल की कीमतें अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर बढ़ेगा तो तेल की कीमत और बढ़ जाएगी। जो कि भारत के लिए एक नई मुश्किल को जन्म दे सकता है।

ऐसे में भारत को अमेरिका के साथ मिलकर बीच का रास्ता निकालने में ही भलाई नजर आती है। अब देखना है कि भारत क्या फैसला लेता है  और उसके पीछे क्या दलीलें पेश करता है। सरकार को देश के हित को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *