अटलबिहारी वाजपेयी का 93 साल की उम्र में दु:खद निधन, एम्स में ली आखिरी सांस

नई दिल्ली। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ अटलबिहारी वाजपेयी का गुरुवार को निधन हो गया। उन्होंने एम्स में शाम 5 बजकर 5 बजे अंतिम सांस ली। किडनी में संक्रमण, छाती में संकुचन और यूरिनरी इंफेक्शंस होने के चलते भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल जी को 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। पूरा देश उनके निधन की खबर से शोक में डूब गया है। शाम 7.30 बजे उनका पार्थिव शरीर उनके घर 6 ए कृष्ण मेनन मार्ग ले जाया जाएगा, जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।
शुक्रवार को अंतिम संस्कार : आज शाम 7.30 बजे जब उनका पार्थिव शरीर उनके घर ले जाया जाएगा, तब केवल निकट के रिश्तेदार ही उनके अंतिम दर्शन करेंगे। शुक्रवार को 9 बजे पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय लाया जाएगा। 2 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी और बाद में दाह संस्कार राजघाट के पीछे यमुना किनारे किया जाएगा।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि अपने जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण देश, संगठन व विचारधारा को पूर्णतः समर्पित कर देना इतना आसान नहीं होता। अटल जी को हम सब ने एक आदर्श स्वयंसेवक, समर्पित कार्यकर्ता, कवि, ओजस्वी वक्ता व अद्भुत राजनेता के रूप में देखा। भाजपा के संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष के नाते उन्होंने संगठन को अपने तप और अथक परिश्रम से सींच कर एक वटवृक्ष बनाया।

अटल जी की छवि इस देश के एक ऐसे जनप्रिय राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरी जिसने सत्ता को सेवा का माध्यम माना और राष्ट्रहितों समझौता किये बगैर बेदाग राजनीतिक जीवन जिया। और यही वजह रही कि देश की जनता ने अपनी सामाजिक और राजनीतिक सीमाओं से बाहर जा कर उन्हें प्यार और सम्मान दिया।

जहां एक तरफ अटल जी ने विपक्ष में जन्मी पार्टी के संस्थापक व सर्वोच्च नेता के तौर पर संसद और देश में एक आदर्श विपक्ष की भूमिका निभाई वहीं प्रधानमंत्री के रूप में देश को एक निर्णायक नेतृत्व भी प्रदान किया। अटल जी ने अपने विचारों और सिद्धांतों से भारतीय राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी है।
अटल जी के विचार, उनकी कविताएं, उनकी दूरदर्शिता और उनकी राजनीतिक कुशलता सदैव हम सबको प्रेरित व मार्गदर्शित करती रहेंगी।

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