भारतीय राजनीति का बहुत बड़ा चेहरा थे करुणानिधि

चेन्नई। एम. करुणानिधि भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे और 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके थे। उनका मंगलवार को निधन हो गया। करुणानिधि से जुड़ी खास बातें…

मुथूवेल करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को तिरुवरूर के तिरुकुवालाई में दक्षिणामूर्ति के नाम से हुआ था। पिता मुथूवेल तथा माता अंजुगम थीं। ईसाई वेलार समुदाय से हैं और उनके पूर्वज तिरुवरूर निवासी थे। 94 वर्ष की उम्र में मंगलवार को उनका निधन हो गया।
उनके 4 बेटे और 2 बेटियां हैं। बेटों के नाम एमके मुथू, जिन्हें पद्मावती ने जन्म दिया था, जबकि एमके अलागिरी, एमके स्टालिन, एमके तमिलरासू और बेटी सेल्वी दयालु अम्मल की संतानें हैं। दूसरी बेटी कनिमोझी तीसरी पत्नी रजति से हैं।
करुणानिधि अपने जीते जी अपना मकान दान कर चुके थे। उनकी इच्छानुसार उनकी मौत के बाद इसे गरीबों के लिए एक अस्पताल में बदल दिया जाएगा।
मात्र 14 की आयु में करुणानिधि ने राजनीति में प्रवेश किया और हिन्दी विरोधी आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने द्रविड़ राजनीति का एक छात्र संगठन भी बनाया। अपने सहयोगियों के लिए उन्होंने ‘मुरासोली’ नाम के एक समाचार पत्र का प्रकाशन किया, जो आज भी चल रहा है।
अपने अब तक के राजनीतिक जीवन में करुणानिधि ने कभी भी हार का मुंह नहीं देखा।
1957 में करुणानिधि पहली बार तमिलनाडु विधानसभा के विधायक बने और बाद में 1967 में वे सत्ता में आए और उन्हें लोक निर्माण मंत्री बनाया गया। 1969 में अन्ना दुराई के निधन के बाद वे राज्य के मुख्यमंत्री बने। 5 बार मुख्यमंत्री और 12 बार विधानसभा सदस्य रहने के साथ-साथ वे राज्य में अब समाप्त हो चुकी विधान परिषद के भी सदस्य रह चुके थे।
अपने कार्यकाल में करुणानिधि ने पुलों और सड़कों के निर्माण कार्य में गहरी दिलचस्पी दिखाई और बहुत से लोकप्रिय कार्यक्रम भी शुरू किए। एक सफल राजनेता, मुख्यमंत्री, फिल्म लेखक, साहित्यकार होने के साथ ही करुणानिधि एक पत्रकार, प्रकाशक और कार्टूनिस्ट भी रहे।
2010 में हुई विश्व क्लासिकल तमिल कॉन्फ्रेंस का अधिकृत थीम सांग एम. करुणानिधि ने ही लिखा था, जिसकी धुन एआर रहमान ने तैयार की थी। कई पुरस्कार और सम्मान उनके नाम हैं। इसके अलावा दो बार डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी नवाज़े गए।
करुणानिधि का कहना था कि वे प्रतिदिन योगाभ्यास करते हैं, जिससे उन्हें ऊर्जा और सफलता मिलती है। करुणानिधि ने तीन शादियां की थी। इनमें से पद्‍मावती का निधन हो चुका है, जबकि दयालु और रजती जीवित हैं।

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