Mon. Jul 22nd, 2019
बापू हैं पर बिना सबूतों के विश्वास नहीं होता

गाजियाबाद (पुनीत माथुर)।

श्री महर्षि वेद व्यास वेद प्रचार समिति के तत्वाधान में ‘हुल्लास कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया । गाज़ियाबाद की महापौर श्रीमती आशा शर्मा, लोनी विधानसभा क्षेत्र के  विधायक नंदकिशोर गुर्जर, सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बीके शर्मा हनुमान, समाजसेवी वी.के.अग्रवाल व सिल्वर शाइन स्कूल की निदेशिका  डॉ. मिथिलेश शर्मा द्वारा  दीप प्रज्ज्वलन किया गया ।  
कवि सम्मेलन का शुभारम्भ श्रीमती इन्दु शर्मा की माँ वीणा पाणी की वन्दना से हुआ तत्पश्चात नवोदित कवि अमित शर्मा ने माहौल को कवितामय करते हुए पढ़ा, “जिंदगी के झंझावात से न हारा कभी, हर पल नए  दर्द मैंने मोल लिए।” बदायूँ से पधारे ओज के सशक्त हस्ताक्षर श्री कुलदीप अंगार ने देश भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा, “धमनी में दौड़ रहा यदि पुरुखों का रक्त, दे डालो चुनौती आज कायर कमीने को।” वरिष्ठ गज़लकार व गीतकार श्री चेतन आनन्द ने माहौल को बदलते हुए पढ़ा, “चलता रहा तो शूल भी फूलों में ढल गए, जब तुम मिले तो हौसलों के रथ मिले मुझे।”  वरिष्ठ गीतकार राजीव सिंघल ने वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा, “धर्म बदला जाति बदली बदल गया है गोत्र, दादा गढ़े कब्र में पंडित बन गया पौत्र।” प्रसिद्ध धर्माचार्य व श्रेष्ठ गीतकार संजीव आर्य रूप ने व्यवहार की महत्ता को रेखांकित करते हुए पढ़ा, “देह मिट जाती है पर प्यार अमर रहता है, आदमी का यहाँ व्यवहार अमर रहता है।” कवि सम्मेलन का सफल संचालन कर रहे सुविख्यात हास्य कवि डॉ. जयप्रकाश मिश्र ने व्यंग्य के माध्यम से श्रोताओं को गुदगुदाते हुए कहा, “शंका करते – करते इक दिन माँ से बोले नेताजी, बापू हैं पर बिना सबूतों के विश्वास नहीं होता ।”  गीतकार श्रीमती इन्दु शर्मा ने ओजस्वी प्रस्तुति देते हुए कहा, “नीच हैं तो नीचता पे आयेंगे जरूर, दुष्ट निज दुष्टता दिखायेंगे जरूर।” कवि सम्मेलन को ऊँचाइयाँ देते हुए वरिष्ठ  हास्य व्यंग्यकार श्री इन्द्रप्रसाद अकेला ने कहा, “भद्र लोगों के बीच सभ्यता से बात करो, बहस करनी है तो विषय वस्तु ज्ञात करो।” देश – विदेश में ओज की पताका फहरा चुके डॉ. अनिल वाजपेई ने करतल ध्वनि के बीच काव्य पाठ करते हुए कहा, “नहीं है जिनकी आँखों में वतन के दर्द का पानी, ज़माने मे कहीं उसका कभी वंदन नहीं होता।” कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि डॉ. जयसिंह आर्य ने यादगार प्रस्तुति देते हुए कहा, “अपने वतन की आन के वंदन की बात कर, माटी के महकते हुए चंदन की बात कर।” 
कवि सम्मेलन का समापन  रात्रि एक बजे संयोजक आचार्य योगेश दत्त गौड़ के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। कवि सम्मेलन में मुख्य रूप से सुनील त्यागी, सन्नी चांदना, मास्टर मनोज नागर, अरविंद तेवतिया, छोटे लाल कनौजिया, मुखिया मोहित गुर्जर, भगवान छलेरीया व  लोकेश चौधरी आदि उपस्थित रहे।

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