Mon. Jul 22nd, 2019

इलैक्ट्रोमैग्रेटिक तरंगों से कैंसर का इलाज: डा. एस.एस. सिबिया

इलैक्ट्रोमैग्रेटिक तरंगों से कैंसर का इलाज: साइटोट्रोन डा. एस.एस. सिबिया

इलैक्ट्रोमैग्रेटिक तरंगों से कैंसर का इलाज: साइटोट्रोन डा. एस.एस. सिबिया

अब कई अध्ययनों और ट्रायलों से यह साफ हो चुका है कि साइटोट्रोन चिकित्सा की मदद से किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और बेहद कम समय मेें कैंसर से छुटकारा पाया जा सकता है. इससे मरीज का डर कम हो जाता है.
जितनी जल्दी कैंसर का निदान किया जाए और उसका उपचार शुरु कराया जाए, उतनी ही जल्दी कैंसर से छुटकारा पाया जा सकता है. इसके सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने के लिए इस रोग का निदान होते ही नियमित उपचार आवश्यक है. साइटोट्रोन थैरेपी क्लीनिकली प्रमाणित की हुई एक ऐसी शल्य रहित प्रक्रिया है जिससे कैंसर की बढ़त को रोका जा सकता है और कैंसर के मरीजों की जिंदगी को सुधारा जा सकता है.
कैंसर क्या होता है?
हमारे शरीर में कई प्रकार के सेल होते हैं. ये भी अपने जीवनकाल के अनुसार बनते हैं और विभाजित होते हैं. फिर इनके खत्म होने के बाद इनकी जगह नए सेल ले लेते हैं. यह ताउम्र एक प्रक्रिया के तहत होता है. पुराने सेलों को समापन और उनकी जगह नए सेलों का आना एक जटिल प्रक्रिया है. अगर इस प्रक्रिया में कोई बदलाव आ जाए तो कई बार ऐसा होता है कि सेल अनियंत्रित तरीके से एक ही जगह पर इकऋे हो जाते हैं और किसी गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेते हैं. ये ट्यूमर बिनाइन या मेलाइनेंट दो प्रकार के हो सकते हैं.
साइटोट्रोन थैरेपी कैसे किया जाता है?
मरीज को साइटोट्रोन बिस्तर पर लिटाया जाता है. फिर किरणों को लेजर की मदद से ट्यूमर पर केंद्रित किया जाता है. एमआरआई के आधार पर कंप्यूटर डोज को गिनता है. इसे प्राय 28 दिनों तक रोजाना एक-एक घंटे तक कराया जाता है.
साइटोट्रोन किस प्रकार कार्य करता है?
साइटोट्रोन एक प्रकार का यंत्र होता है जो कि आर एफ क्यू एम आर का निर्माण करता है. आर एफ क्यू एम आर किरणों में कम ऊर्जा, नॉन-थर्मल, रेडियो या सब-रेडियो तीव्रता वाली इलैक्ट्रोमैग्रेटिक तरंगे होती हैं जो कि सेलों के अंदर और बाहर मौजूद प्रोटोन स्पिन को वोल्टेज पैदा करने की क्षमता का निर्माण करने के लिए परिवर्तित करती है. आर एफ क्यू एम आर कैंसर के सेलों को समाप्त नहीं करतीं, बल्कि अनियंत्रित मिटोसिस को रोकती हैं और सेलों को वानस्पतिक अवस्था में लाती हैं. इस प्रक्रिया के दौरान कैंसरग्रस्त सेल विकारग्रस्त होते जाते हैं, क्यों कि नियमित समय के अनुसार इनकी क्षति होना स्वाभाविक होता है.
क्या साइटोट्रोन सुरक्षित और आरामदायक है?
इस चिकित्सा के दौरान मरीज को किसी प्रकार का दर्द या असहजता महसूस नहीं होती. साइटोट्रोन को डी आर डी ओ के द्वारा सुरक्षित, कम ऊर्जा वाला और नान-थर्मल प्रमाणित किया जा चुका है. ये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए मानकों को पूरा करता है.
किन प्रकार के कैंसरों को इससे ठीक किया जा सकता है?
साइटोट्रोन से लगभग सभी प्रकार के जैसे- दिमाग, स्तन, सर्विक्स, ब्लैडर, कोलोन या रेक्टम, लिवर, फेफड़ा, सिर, गला, मुंह, नाक, ओवेरियन, पैनक्रियाटिक, गुर्दा, पेट, गर्भाशय कैंसर आदि को ठीक किया जा सकता है.
साइटोट्रोन उपचार से पहले कौन से टैस्ट आदि कराने पड़ सकते हैं?
कैंसरग्रस्त भाग का एम आर आई, रक्त, मूत्र जांच आदि सामान्य टेस्ट कराने पड़ते हैं.
क्या साइटोट्रोन अधिक उम्र में भी कराया जा सकता है?
जी हां, ये वृद्धावस्था में भी कराया जा सकता है.
कौन से मरीज साइटोट्रोन के लिए अयोग्य हैं?
गर्भवती महिलाओं और एम आर आई के अयोग्य मरीजों का उपचार इस प्रक्रिया से नहीं किया जा सकता.
क्या मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हार्ट डिसीज के मरीजों में साइटोट्रोन से उपचार करना संभव है?

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